रायपुर छत्तीसगढ़ में ‘भारत सीरीज’ (BH Series) के वाहनों की खरीद-बिक्री को लेकर जल्द ही एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक के कड़े नियमों के मुताबिक बीएच सीरीज की पुरानी (सेकंड-हैंड) गाड़ियां केवल उन्हीं लोगों को बेची जा सकती थीं, जो इस खास सीरीज की पात्रता शर्तों को पूरा करते थे। लेकिन, राज्य सरकार अब इस नियम को बेहद आसान बनाने जा रही है, जिससे आम नागरिक भी री-सेल मार्केट में बीएच सीरीज की पुरानी गाड़ियां आसानी से खरीद सकेंगे।
टैक्स चुकाते ही ‘BH’ से ‘CG’ सीरीज में बदल जाएगा नंबर परिवहन विभाग द्वारा जल्द ही जारी होने वाली नई अधिसूचना के तहत, यदि कोई आम नागरिक बीएच सीरीज की सेकंड-हैंड गाड़ी खरीदता है, तो उसे उस वाहन का बकाया रोड टैक्स खुद जमा करना होगा। जैसे ही खरीदार पूरा टैक्स जमा कर देगा, परिवहन विभाग उस गाड़ी का नंबर बीएच सीरीज से बदलकर सामान्य ‘CG’ (छत्तीसगढ़) सीरीज में तब्दील कर देगा। इस व्यवस्था से नाम ट्रांसफर (ओनरशिप ट्रांसफर) की प्रक्रिया बेहद सरल हो जाएगी।
दो साल से ठप पड़ी थी री-सेल, आपसी एग्रीमेंट का लेना पड़ रहा था सहारा वर्तमान नियमों की सख्ती के कारण बीएच सीरीज की गाड़ियों का ओनरशिप ट्रांसफर लगभग नामुमकिन हो गया था। हालात यह थे कि अगर कोई पिता अपनी बीएच सीरीज की गाड़ी परिवार के किसी सदस्य के नाम भी करना चाहे, तो वह तब तक संभव नहीं था जब तक कि वह सदस्य भी बीएच सीरीज का पात्र न हो। अकेले रायपुर आरटीओ में नाम ट्रांसफर के 50 से अधिक आवेदन इसी वजह से अटके पड़े हैं। वहीं, सरगुजा और बस्तर संभाग जैसे इलाकों में पिछले दो सालों में एक भी गाड़ी की ओनरशिप आधिकारिक तौर पर नहीं बदली है और लोग मजबूरी में सिर्फ आपसी एग्रीमेंट के आधार पर ही गाड़ियां बेच रहे थे।
टैक्स संरचना में है बड़ा अंतर दोनों सीरीज के रोड टैक्स के नियम पूरी तरह अलग हैं। बीएच सीरीज में वाहनों का रोड टैक्स केवल दो-दो वर्ष के लिए जमा होता है और वाहन खरीदते समय सिर्फ दो साल का टैक्स देना पड़ता है। वहीं, सामान्य CG सीरीज की गाड़ी खरीदते समय एकमुश्त 15 साल का रोड टैक्स देना अनिवार्य होता है। नए नियमों के आने से जहां बीएच सीरीज की गाड़ी बेचने वालों को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं आम खरीदारों को भी सेकंड-हैंड मार्केट में गाड़ियां खरीदने के ज्यादा विकल्प मिल सकेंगे।

