मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट की अहम बैठक 15 अप्रैल को
भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन और साइबर अपराधों से निपटने के लिए वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के विरुद्ध भारत की लड़ाई को और अधिक मजबूत बनाना है। अब ये दोनों एजेंसियां एक-दूसरे के साथ संदिग्ध लेनदेन और अपराधियों की जानकारी साझा करेंगी, जिससे साइबर ठगों को पकड़ना और उनके द्वारा लूटे गए पैसे की वसूली करना काफी आसान हो जाएगा।

यह सहयोग ऐसे समय में हुआ है जब देश का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम काफी बड़ा हो गया है और नागरिकों को ठगी से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस समझौते के बाद, बैंक और वित्तीय संस्थानों को भी समय-समय पर चेतावनी और गाइडलाइंस जारी की जाएंगी, ताकि वे धोखाधड़ी के शुरुआती संकेतों को पहचान सकें। गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाला साइबर अपराध केंद्र (I4C) और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली खुफिया इकाई (FIU) अब मिलकर एक ऐसा ‘सुरक्षा चक्र’ तैयार करेंगे, जिससे ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह “समग्र सरकारी” दृष्टिकोण आने वाले समय में साइबर अपराधों को जड़ से खत्म करने में मील का पत्थर साबित होगा।

