रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ ऑर्डर जारी कर दिया है। आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहे इस आदेश में आयोग ने केवल बिजली की दरों में ही संशोधन नहीं किया है, बल्कि राज्य के इतिहास में पहली बार बिलिंग और पेनल्टी सिस्टम में एक बड़ा और पारदर्शी बदलाव किया है। इस नए फैसले से जहां एक तरफ लेट पेमेंट करने वाले लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल और एडवांस पेमेंट करने वाले जागरूक उपभोक्ताओं को थोड़ा झटका लगा है।
पहली बार लागू हुई ‘प्रतिदिन के मीटर’ वाली नई पेनल्टी व्यवस्था
अब तक छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी (सीएसपीडसीएल) का यह नियम था कि यदि कोई उपभोक्ता तय तारीख (ड्यू डेट) तक बिल नहीं पटा पाता था, तो उस पर सीधे पूरे महीने का 1.5% फ्लैट विलंबित भुगतान अधिभार (डेले पेमेंट सरचार्ज) ठोक दिया जाता था। यानी यदि आप महज दो दिन की देरी से भी बिल जमा करते थे, तब भी आपसे पूरे 30 दिनों का जुर्माना वसूला जाता था।
नियामक आयोग ने इस नाइंसाफी को खत्म करते हुए अब ‘लेट पेमेंट पर फ्लैट रेट नहीं, प्रतिदिन का मीटर’ वाली व्यवस्था लागू कर दी है। अब प्रति माह के बजाय 0.04% प्रति दिन (पर डे) के हिसाब से जुर्माना तय किया गया है। इसका मतलब यह है कि यदि आपका बिल दो दिन लेट होता है, तो जुर्माना सिर्फ दो दिन का ही लगेगा, पूरे महीने का नहीं।
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डिजिटल और एडवांस पेमेंट करने वालों को लगा झटका
एक ओर जहां लेट पेमेंट करने वालों का बोझ कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनी के राजस्व को संतुलित करने के लिए आयोग ने रियायतों (इंसेंटिव्स) में पहली बार कटौती की है। जो उपभोक्ता अपने बिजली बिल का एडवांस भुगतान करते थे, उन्हें मिलने वाली 1.25% की छूट को अब घटाकर सीधे 0.75% कर दिया गया है। इसी तरह, घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने और उसे रीचार्ज करने पर मिलने वाली 1.5% की इंसेंटिव छूट को भी घटाकर अब 1% कर दिया गया है।
बिजली दरों का नया गणित: केवल 6.23% की औसत वृद्धि
बिजली कंपनी ने करीब 6 हजार करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देते हुए दरों में 24 प्रतिशत बढ़ोतरी का भारी-भरकम प्रस्ताव दिया था, जिसे आयोग ने खारिज कर दिया। आयोग ने केवल 6.23 प्रतिशत की औसत वृद्धि को ही हरी झंडी दी है। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं (एलवी-1) के लिए ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे से 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है।
इस क्रमिक टैरिफ (टेलीस्कोपिक टैरिफ) के अनुसार, यदि आपके घर की मासिक खपत 100 यूनिट है, तो पहले के ₹410 के मुकाबले अब नया ऊर्जा प्रभार ₹440 आएगा (यानी ₹30 का अंतर)। इसी तरह 200 यूनिट की खपत पर अब कुल ऊर्जा प्रभार ₹890 बनेगा, जिसमें ₹60 प्रति माह की वृद्धि होगी। कूलर या एसी चलाने वाले घर, जहां खपत 300 यूनिट तक जाती है, उनका नया ऊर्जा बिल अब ₹1,490 आएगा, जो पहले से ₹100 अधिक है। वहीं 500 यूनिट बिजली जलाने वाले बड़े उपभोक्ताओं का नया बिल ₹2,790 का बनेगा, जिससे उनकी जेब पर सीधे ₹180 प्रति माह का अतिरिक्त भार पड़ेगा। (ध्यान रहे कि इस गणना में फिक्स चार्ज, सरकारी ड्यूटी और उपकर शामिल नहीं हैं, हालांकि राहत की बात यह है कि 5 किलोवाट तक के लोड पर फिक्स चार्ज ₹20 प्रति किलोवाट पर ही स्थिर है।)
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स्थानीय निकायों को बड़ी बचत और किसानों को सुरक्षा कवच
इस नए टैरिफ ऑर्डर में कुछ अन्य बेहद महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए हैं। इतिहास में पहली बार नगर निगमों, नगर पालिकाओं और छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड की कॉलोनियों की स्ट्रीट लाइट तथा सार्वजनिक जल आपूर्ति (पब्लिक वॉटर वर्क्स) के टैरिफ को ‘गैर-घरेलू’ (एलवी-2) से हटाकर सीधे ‘घरेलू उपभोक्ता‘ (एलवी-1) श्रेणी में डाल दिया गया है, जिससे सरकारी निकायों का बिजली खर्च लगभग आधा हो जाएगा।
साथ ही, गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शन का उपयोग करने वाले किसानों को मिलने वाली छूट को एक झटके में 30% से बढ़ाकर सीधे 40% कर दिया गया है, जो अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त राहत है। इसके अलावा, बस्तर और सरगुजा सहित उत्तर व दक्षिण आदिवासी विकास प्राधिकरणों के तहत संचालित ग्रामीण अस्पतालों, हॉस्टलों और नर्सिंग होम को मिलने वाली 10 प्रतिशत की विशेष छूट को आगे भी बरकरार रखा गया है।



