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नई दिल्ली/रायपुर: राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) के किनारे अपना मकान बनाने या कोई नया व्यवसाय जैसे पेट्रोल पंप, होटल, ढाबा या फूड कोर्ट शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत दी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने विशेष पोर्टल **’राजमार्ग प्रवेश’** का अपग्रेडेड वर्जन लॉन्च कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब एनओसी (NOC) और कनेक्टिंग रोड की अनुमति के लिए आवेदकों को एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि पूरी प्रक्रिया एक ही क्लिक पर ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी।
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पारदर्शिता और तेजी से बढ़ेगा निवेश
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के इस कदम का मुख्य उद्देश्य हाईवे के किनारे सुविधाओं का विस्तार करना और निवेश की प्रक्रिया को सरल बनाना है। पहले किसी भी व्यवसाय के लिए अलग-अलग विभागों से अनुमति लेने में महीनों का समय और काफी मेहनत लगती थी, जिससे कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अटकी रहती थीं। अब आवेदक अपने सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे और पोर्टल पर ही अपने आवेदन की स्थिति (Status) ट्रैक कर पाएंगे। इससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगी।
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यात्रियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं और बढ़ेगा रोजगार
राजमार्गों पर सुविधाओं के बढ़ने से यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। हाईवे पर अधिक पेट्रोल पंप, रेस्ट एरिया और फूड कोर्ट खुलने से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले चालकों और यात्रियों को भोजन, ईंधन और आराम के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही, हाईवे के आसपास व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और छोटे व्यापारियों को भी अपने व्यापार को विस्तार देने का मौका मिलेगा।
टेलीकॉम और गैस पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए भी राहत
यह पोर्टल केवल निजी व्यवसायों तक सीमित नहीं है। अब टेलीकॉम कंपनियां हाईवे किनारे ऑप्टिकल फाइबर बिछाने, गैस या पानी की पाइपलाइन डालने और बिजली लाइन स्थापित करने जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भी ऑनलाइन अनुमति ले सकेंगी। पहले इन कार्यों के लिए फाइलों के लंबित रहने से परियोजनाएं महीनों तक अटकी रहती थीं, लेकिन अब एकीकृत ऑनलाइन प्रणाली के कारण सभी मंजूरी एक निश्चित समय सीमा के भीतर मिल सकेंगी।
NHAI की यह पहल ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। साल भर में आने वाले औसतन 600 से अधिक आवेदनों का अब त्वरित निराकरण होगा, जिससे न केवल आवेदकों के समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी एक नई गति मिलेगी।
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