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रायपुर | 18 मार्च, 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सदन की कार्यवाही हंगामेदार रही। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने जंबूरी आयोजन में भ्रष्टाचार और अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के मुद्दे पर सरकार को घेरा। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के जवाबों से असंतुष्ट होकर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने जंबूरी आयोजन में बड़े स्तर पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए विधानसभा की विशेष समिति से जांच कराने की मांग की। उन्होंने सदन को बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था। राघवेंद्र सिंह के अनुसार, पहला टेंडर 10 दिसंबर 2025 को जारी हुआ था, जिसे बाद में निरस्त कर 23 दिसंबर 2025 को दूसरा टेंडर निकाला गया। इसके अलावा, आयोजन की शर्तों और बिंदुओं को भी 90 से घटाकर 52 कर दिया गया, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या रायपुर के स्थान पर बालोद में आयोजन का निर्णय जानबूझकर किया गया था।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ राज्य स्काउट गाइड के अध्यक्ष स्वयं शिक्षा मंत्री होते हैं और बालोद में राष्ट्रीय जंबूरी के आयोजन का निर्णय दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मुख्यालय द्वारा लिया गया था। मंत्री ने कहा कि आयोजन की क्रियान्वयन एजेंसी बालोद जिला शिक्षा अधिकारी थे और पूरी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों का पालन किया गया है। उन्होंने किसी भी प्रकार की जांच की आवश्यकता से इनकार कर दिया, जिससे नाराज होकर विपक्षी सदस्यों ने सदन छोड़ दिया।
इसी सत्र के दौरान अतिथि शिक्षकों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कांग्रेस विधायक विक्रम मांडवी ने राज्य सरकार से अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की कार्ययोजना पर सवाल पूछा। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया कि वर्तमान में सरकार के पास उन्हें नियमित करने की कोई योजना नहीं है। मंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश के सभी अतिथि शिक्षकों को 20 हजार रुपये का समान मानदेय दिया जा रहा है और उनका भुगतान उपस्थिति के आधार पर किया जाता है। सरकार के इस रुख को विपक्ष ने वादाखिलाफी बताया और तीखी नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए।

