*उमेश कुमार प्रजापति सरगुजा* बीजापुर, 30 जून। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बीजापुर द्वारा एक माह तक चलाए गए “खेत बचाओ अभियान” का मंगलवार को सावनार ग्राम में सफल समापन हुआ। समापन समारोह में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने तथा कृषि भूमि, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लिया।
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यह अभियान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस.एस. टुटेजा के निर्देशानुसार तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री अरुण सकनी के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
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केंद्र सरकार के निर्देशानुसार देशभर में 1 जून से 30 जून 2026 तक संचालित इस विशेष अभियान के माध्यम से किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपजाऊ कृषि भूमि, स्वच्छ पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया गया।
जिले के सभी चारों विकासखंडों में अभियान का व्यापक प्रभाव देखने को मिला। अभियान के दौरान उसूर विकासखंड के 84 ग्राम, भोपालपटनम के 80 ग्राम, भैरमगढ़ के 111 ग्राम तथा बीजापुर विकासखंड के 100 ग्रामों में विभिन्न जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। पूरे अभियान में जिले के 5 हजार से अधिक किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
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अभियान के सफल संचालन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर द्वारा चार टीमों का गठन किया गया था। सभी टीमें प्रतिदिन अलग-अलग विकासखंडों में पहुंचकर किसानों से संवाद, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करती रहीं।
अधिकारियों ने बताया कि किसानों में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति बढ़ती जागरूकता भविष्य में जिले की कृषि को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
समापन अवसर पर किसानों ने रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
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कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में भी किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों, प्राकृतिक खेती एवं जैविक कृषि के संबंध में लगातार प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा।

