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नई दिल्ली। खाने के तेल और चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों के बीच दालों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में चना, अरहर, मूंग और मटर जैसी प्रमुख दालों की थोक कीमतों में तेजी देखने को मिली है। कुछ दालों के दाम में महीनेभर में करीब 10 से 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में भी प्रमुख दालों की कीमतों में 3 से 5 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर फसल की आशंका, मौसम की स्थिति और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने का असर दालों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
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चना दाल की कीमत में सबसे ज्यादा तेजी
देश में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दालों में शामिल चने की थोक कीमत में पिछले एक महीने में करीब 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली को छोड़कर अन्य प्रमुख बाजारों में चने की कीमत सप्ताहभर में भी करीब 5.5 प्रतिशत बढ़ी है।
वहीं अरहर की कीमत में पिछले एक महीने में करीब 6.5 प्रतिशत और पिछले एक सप्ताह में 2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मूंग की कीमत महीनेभर में 10.6 प्रतिशत और सप्ताहभर में 4.3 प्रतिशत बढ़ी है। मटर की कीमत में एक महीने के दौरान करीब 6 प्रतिशत और पिछले सप्ताह करीब 3 प्रतिशत की तेजी आई है।
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एक साल में मटर 47% तक महंगा
सालाना आधार पर भी कुछ दालों की कीमतों में बड़ी वृद्धि हुई है। आंकड़ों के मुताबिक चने की कीमत में पिछले एक साल में करीब 23 प्रतिशत और उड़द में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मटर की कीमत में सबसे ज्यादा करीब 47 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।
इसके मुकाबले मसूर और मूंग की कीमतों में सालाना आधार पर करीब 2 प्रतिशत और 4 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है।
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मौसम और कम बारिश का असर
दालों की कीमतों में तेजी के पीछे मौसम को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश और नमी की स्थिति ने फसल को लेकर चिंता बढ़ाई है। कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति का भी फसल पर असर पड़ने की बात कही गई है।
IPGA के सचिव सतीश उपाध्याय के मुताबिक चने की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। नमी की कमी के कारण रबी फसल की बुवाई को लेकर चिंता बनी हुई है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया से चने की उपलब्धता पिछले साल की तुलना में कम रहने की संभावना भी बाजार पर असर डाल रही है।
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त्योहारों में बढ़ी मांग ने भी बढ़ाया दबाव
त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ दालों की मांग बढ़ी है। घरों में खपत के साथ मिठाई, नमकीन और अन्य खाद्य उत्पादों में दालों और बेसन की मांग बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव आया है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली मटर की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। पीली मटर को चने के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। रूस से आपूर्ति प्रभावित होने और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ रहा है।
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आने वाले दिनों में क्या होगा?
दालों की कीमतों की दिशा अब नई फसल की बुवाई, मौसम, आयात की उपलब्धता और त्योहारी मांग पर निर्भर करेगी। अगर रबी की बुवाई और उत्पादन उम्मीद के मुताबिक रहा तथा घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रही तो आगे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। वहीं फसल या आयात से जुड़ी चुनौतियां बनी रहीं तो दालों की कीमतों में तेजी का असर खुदरा बाजार तक पहुंच सकता है।
इसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक रसोई बजट पर पड़ सकता है, क्योंकि चना, अरहर, मूंग, उड़द और मटर जैसी दालें भारतीय घरों में रोजमर्रा की खपत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।



