रायपुर। केंद्र सरकार ने रायपुर समेत देश के 11 एयरपोर्ट को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत जल्द ही टेंडर और बिड की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल रायपुर एयरपोर्ट का संचालन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के पास है, लेकिन निजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संचालन की जिम्मेदारी चयनित निजी कंपनी को सौंप दी जाएगी।
2028 के बाद 50 साल तक निजी कंपनी करेगी संचालन
एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक बिड, टेंडर और हैंडओवर की पूरी प्रक्रिया में करीब दो साल का समय लग सकता है। सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी को एयरपोर्ट का संचालन 50 साल के लिए सौंपे जाने की योजना है। इसके बदले केंद्र सरकार को निजी कंपनी से तय राशि प्राप्त होगी। देश के जयपुर, मुंबई, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे कई बड़े एयरपोर्ट पहले से ही निजी कंपनियों के संचालन में हैं। रायपुर एयरपोर्ट के निजीकरण के बाद भी संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सुरक्षा और एयर ट्रैफिक कंट्रोल AAI के पास
निजीकरण के बावजूद एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था निजी कंपनी के हाथ में नहीं जाएगी। एयरपोर्ट की सुरक्षा पहले की तरह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के पास ही रहेगी। वहीं एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की जिम्मेदारी भी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास ही रहेगी। निजी कंपनी मुख्य रूप से एयरपोर्ट के संचालन, प्रबंधन, यात्री सुविधाओं और व्यावसायिक गतिविधियों को संभालेगी।
बढ़ सकती हैं सुविधाएं, टिकट और पार्किंग शुल्क पर भी नजर
निजीकरण के समर्थकों का मानना है कि निजी कंपनी एयरपोर्ट की सुविधाओं को आधुनिक बनाने और यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए निवेश कर सकती है। रायपुर एयरपोर्ट की देश-विदेश में बेहतर ब्रांडिंग होने से भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
हालांकि, निजी संचालन के बाद टिकट से जुड़े शुल्क और पार्किंग जैसी सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है। देश के कुछ निजी एयरपोर्ट पर शुल्क बढ़ने के उदाहरण सामने आ चुके हैं। ऐसे में रायपुर एयरपोर्ट के निजीकरण के बाद यात्रियों पर इसका आर्थिक असर कितना पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। कुल मिलाकर, रायपुर एयरपोर्ट का निजीकरण एयरपोर्ट की सुविधाओं और संचालन में बड़े बदलाव का रास्ता खोल सकता है। अब सभी की नजर टेंडर प्रक्रिया और निजी कंपनी के चयन पर रहेगी।


