छाल थाना क्षेत्र में मारपीट, लूट व कथित अपहरण का मामला गहराया: पीड़ितों ने पुलिस पर लगाया शिथिलता का आरोप, एसडीओपी और एसपी से न्याय की गुहा
रायगढ़ :- जिले के छाल थाना क्षेत्र अंतर्गत मारपीट, अवैध वसूली और कथित अपहरण के गंभीर मामले ने तूल पकड़ लिया है। पीड़ितों ने स्थानीय छाल थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मामले में लीपापोती और आरोपियों को संरक्षण देने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पीड़ितों का कहना है कि गंभीर गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद मुख्य आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं। पुलिस की इस कथित निष्क्रियता के खिलाफ अब पीड़ित पक्ष ने अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) खरसिया और पुलिस अधीक्षक, रायगढ़ के समक्ष औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच व सुरक्षा की मांग की है।
रास्ता रोककर मारपीट और चाकू से हमला, लूटपाट की भी दर्ज हुई एफआईआर
पुलिस में दर्ज मामले और शिकायत के अनुसार, घटना 6 अगस्त 2026 की रात करीब 9 बजे की है। बड़े डूमरपाली निवासी मालिकराम डनसेना (27 वर्ष) ने बताया कि वह बरभौना मार्ग स्थित ठाकुरदेव देवरास गेट के पास वाहन चालकों शत्रुहन वासुदेव, प्रहलाद तुरी और डोरीलाल खड़िया को खाना देने गया था। खाना देकर लौटते समय चालकों ने सूचना दी कि रास्ते में कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी रोक ली है और विवाद कर रहे हैं।
मालिकराम जब मौके पर पहुंचा, तो सफेद रंग के वाहन में सवार शेखर डनसेना, दुर्गा डनसेना, गुलाब डनसेना, कोमल दर्शन, विक्रम महंत, प्रेम राठिया और खिलेश्वर कुम्हार सहित अन्य लोगों ने रास्ता रोककर गाली-गलौज शुरू कर दी। मना करने पर जान से मारने की नीयत से चाकू से हमला किया गया, जिसमें प्रार्थी का कपड़ा फटा और उसे चोटें आईं। आरोप है कि इस दौरान जेब में रखे 2200 रुपये भी जबरन छीन लिए गए तथा हाईवा वाहन के पहिए की हवा निकाल दी गई। पीड़ित का आरोप है कि घटना की तत्काल सूचना दिए जाने के बावजूद छाल पुलिस हीलाहवाली करती रही और करीब 13 दिन बाद 19 अगस्त को अपराध क्रमांक 0195/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3), 115(2), 126(2), 119(1) और 3(5) में मामला दर्ज किया गया।
घर में घुसकर मां से अभद्रता, चालक को बोलेरो में अगवा कर जबरन कराया राजीनामा
मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब इस घटना के गवाह डोरीलाल खड़िया (निवासी रजघट्टा) के साथ कथित तौर पर अपहरण की वारदात हुई। डोरीलाल ने मीडिया और पुलिस उच्चाधिकारियों को दिए बयान में बताया कि 13 अगस्त की रात करीब 9 बजे दुर्गा डनसेना, घनश्याम डनसेना और गुलाब डनसेना जबरन उनके घर में घुस आए। विरोध करने पर उनकी वृद्ध मां मांगमती खड़िया के साथ धक्का-मुक्की व मारपीट की गई। इसके बाद आरोपी डोरीलाल को जबरन सफेद बोलेरो वाहन में बैठाकर छाल की ओर ले गए।
पीड़ित के अनुसार, रास्ते भर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और आधी रात करीब 12 बजे एक कमरे में बंधक बनाकर सुलह व राजीनामे के सादे कागजों पर जबरन दस्तखत करवाए गए। पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि आरोपी लगातार गांव-गांव में पंचायत बैठाकर और जान से मारने की धमकियां देकर गवाहों पर बयान बदलने का दबाव बना रहे हैं।
पुराने वसूली सिंडिकेट से जुड़े तार, छाल पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में
शिकायतकर्ताओं ने यह भी खुलासा किया है कि आरोपी पक्ष के खिलाफ छाल थाने में पहले से ही अपराध क्रमांक 0143/2026 के तहत धारा 308(2) व 3(5) बीएनएस का गंभीर अपराध दर्ज है। आरोप है कि ‘मजदूर एकता सेवा समिति’ नामक संगठन के नाम पर वाहन चालकों से प्रतिमाह 700 रुपये की अवैध वसूली और धमकाने का काम किया जाता था। हाल ही में 24 अगस्त को धर्मजयगढ़ न्यायालय में चालान पेश होने पर आरोपियों को इस पुराने मामले में जमानत मिल गई।
पीड़ितों का कहना है कि जब छाल थाने में ही उनके खिलाफ अपराध क्रमांक 0195/2026 के तहत गैर-जमानती धाराओं में नया मामला दर्ज है, तो पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित क्यों नहीं की? पीड़ितों का सीधा आरोप है कि स्थानीय पुलिस आरोपियों पर शिकंजा कसने के बजाय उन्हें खुला संरक्षण दे रही है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
वरिष्ठ अधिकारियों की दखल के बाद कार्रवाई की उम्मीद
लगातार मिल रही धमकियों और स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से आहत होकर पीड़ितों ने रायगढ़ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उप पुलिस अधीक्षक महोदय को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर जान-माल की रक्षा और सभी आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि जिला पुलिस प्रशासन एस. एस. पी. शशि मोहन सिंह जी इस पूरे घटनाक्रम को कितनी गंभीरता से लेतें है और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए क्या कड़े कदम उठातें है।


