मोहब्बत का ‘देसी वर्जन’: जहाँ सादगी ही सबसे बड़ा श्रृंगार और सरई ही सबसे बड़ा उपहार है
जशपुर।
जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली ईब और मैनी नदी इन दिनों रेत माफियाओं के चंगुल में हैं। जिले के कई क्षेत्रों में बिना किसी वैध टेंडर और अनुमति के रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि भारी मशीनों (JCB) और दर्जनों हाइवा-ट्रैक्टरों के जरिए नदियों का स्वरूप बिगाड़ा जा रहा है, लेकिन खनिज और राजस्व विभाग ने जैसे अपनी आँखें मूंद ली हैं।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष यू. डी. मिंज ने सीधा आरोप लगाया है कि यह खेल प्रशासनिक संरक्षण में चल रहा है। उन्होंने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहाँ से रेत निकाली जा रही है, वहाँ का कोई आधिकारिक टेंडर तक नहीं हुआ है। इसके बावजूद दिन-रात मशीनों से खुदाई जारी है, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि पर्यावरण के साथ बड़ा खिलवाड़ भी है।
उन्होंने कहा कि नियमों की धज्जियाँ उड़ रही है,मशीनों का अवैध उपयोग हो रहा है, एनजीटी (NGT) के नियमों के अनुसार नदी से रेत निकालने के लिए भारी मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है, फिर भी यहाँ बेखौफ होकर JCB का इस्तेमाल हो रहा है।
उन्होंने कहा कि बिना टेंडर के हो रहे इस अवैध कारोबार से शासन को मिलने वाली लाखों रुपये की रॉयल्टी की चोरी की जा रही है।रेत के अंधाधुंध दोहन से नदियों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिसका सीधा असर भविष्य में क्षेत्र की खेती और पेयजल पर पड़ेगा।
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यू. डी. मिंज का कहना है कि रेत से लदे भारी हाइवा गाँवों की सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं और विरोध करने पर माफियाओं द्वारा डराया-धमकाया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी इस अवैध कारोबार को और बढ़ावा दे रही है। यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में ईब और मैनी नदियाँ केवल इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगी।

