रायपुर। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में पिछले दो दिनों से पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, दंतेवाड़ा, महासमुंद और सरगुजा जैसे संभागों में ईंधन का संकट गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां अधिकांश पेट्रोल पंप ‘ड्राई’ होने के कारण बंद हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ खुले हुए पंपों पर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं। स्थिति यह है कि कई पंप संचालक तेल खत्म होने के डर से सीमित मात्रा में ईंधन दे रहे हैं, जिससे आम जनता के बीच भारी नाराजगी और बेचैनी देखी जा रही है। महासमुंद जैसे शहरों में तो दोपहिया वाहनों को मात्र 2 लीटर और कारों को 5 लीटर ही पेट्रोल दिया जा रहा है, जबकि दंतेवाड़ा में डीजल खत्म होने से मालवाहक वाहनों के पहिए थमने की नौबत आ गई है।
इस गहराते संकट के बीच प्रदेश की खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले ने मोर्चा संभालते हुए स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल का 45,474 किलोलीटर और डीजल का 84,654 किलोलीटर स्टॉक मौजूद है, जो दैनिक आवश्यकता की तुलना में कई गुना अधिक है। खाद्य सचिव के अनुसार, रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में कुछ ही पंप तकनीकी कारणों या सप्लाई चेन के कारण अस्थायी रूप से ड्राई हुए हैं, जिन्हें ऑयल कंपनियों के डिपो से लगातार आपूर्ति भेजी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि आज भी डिपो में भारी मात्रा में नया स्टॉक प्राप्त हुआ है, जिससे स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ जाएगी।
प्रशासनिक आंकड़ों और दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। राजधानी रायपुर के 35 और बिलासपुर के 13 पंपों पर ईंधन खत्म होने की आधिकारिक पुष्टि की गई है। सप्लाई में आए इस व्यवधान ने अफवाहों को हवा दे दी, जिससे लोग घबराहट में आकर अपनी जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवाने लगे हैं। खाद्य सचिव ने इस ‘पैनिक खरीदी’ को कृत्रिम अभाव का मुख्य कारण बताया है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या अफवाह का शिकार न हों और अनावश्यक रूप से तेल का संग्रहण न करें। शासन और तेल कंपनियां मिलकर स्थिति की निगरानी कर रही हैं और आने वाले घंटों में सभी बंद पड़े पंपों पर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

