रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में अपनी सेवाएं दे रहे पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए राज्य शासन ने बड़ी राहत दी है। लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ोतरी की राह देख रहे डॉक्टरों के मानदेय में आखिरकार संशोधन कर दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग (डीएमई) ने इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिया है। सरकार के फैसले के अनुसार, सभी पात्र डॉक्टरों को बढ़ी हुई दर से स्टाइपेंड का भुगतान 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी रूप से किया जाएगा।
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17 सूत्रीय मांगों को लेकर जेडीए का आंदोलन लाया रंग
यह फैसला प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों द्वारा किए गए व्यापक आंदोलन के बाद सामने आया है। छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) के बैनर तले डॉक्टरों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर मोर्चा खोला था।
राजधानी रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और डॉ. बीआर अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय समेत बिलासपुर, जगदलपुर और अन्य जिलों के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में भी डॉक्टरों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। हड़ताल और कार्य बहिष्कार की स्थिति बनने से ओपीडी व स्वास्थ्य सेवाओं पर खासा असर पड़ा था। आंदोलनरत डॉक्टरों की प्राथमिक मांग पड़ोसी राज्यों की तुलना में स्टाइपेंड को संशोधित और तर्कसंगत बनाने की थी, जिसे अब शासन ने स्वीकार कर लिया है।
संशोधित मानदेय 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा, जिससे आगामी माह के वेतन बिल में यह वृद्धि जुड़कर मिलेगी। राज्य के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत पीजी (एमडी/एमएस/डिप्लोमा) रेजिडेंट्स और संबंधित गैर-शैक्षणिक रेजिडेंट डॉक्टर इस आदेश के दायरे में आएंगे। इससे पहले राज्य शासन ने एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की थी। अब पीजी स्तर के स्टाइपेंड में भी संशोधन होने से डॉक्टरों के बीच लंबे समय से चली आ रही विसंगति दूर हो गई है।
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स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद
स्टाइपेंड बढ़ोतरी का औपचारिक आदेश जारी होने के बाद जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने राहत की सांस ली है। सरकारी अस्पतालों की रीढ़ माने जाने वाले पीजी और रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग पूरी होने से अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं और इमरजेंसी वार्डों का संचालन अब बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल सकेगा।



