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शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और स्मॉल-कैप शेयरों में नुकसान के बाद बड़ी संख्या में निवेशक अब सोना-चांदी की रिकॉर्ड तेजी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई रिटेल निवेशक अपने शेयर बेचकर Gold ETF और Silver ETF में पैसा लगाने की सोच रहे हैं। हालांकि, बाजार विशेषज्ञ इसे जल्दबाजी भरा फैसला मानते हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि सिर्फ हालिया मुनाफे को देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

कितनी तेज है सोना-चांदी की चाल?

कीमती धातुओं में आई तेजी वाकई चौंकाने वाली है। मंगलवार को दिल्ली में 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमत में 7,300 रुपये की उछाल दर्ज की गई और भाव 1,66,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया।
वहीं, चांदी की कीमतों में एक ही दिन में 40,500 रुपये की भारी तेजी आई और यह 3,70,000 रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। बीते सात दिनों में ही सोने की कीमत करीब 9% बढ़ चुकी है।

शेयर बाजार में गिरावट, सोना-चांदी रिकॉर्ड हाई पर: क्या शेयर बेचने का सही वक्त है?

तेजी की वजह क्या है?

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में अब तक सोने ने करीब 75% और चांदी ने 120% तक का रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी सिर्फ 10% ही बढ़ पाया है। Lighthouse Canton के इन्वेस्टमेंट हेड प्रदीप गुप्ता का कहना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता ने सोना-चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प बना दिया है।

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क्या शेयर बेचकर निवेश करना जोखिम भरा है?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि शेयर बेचकर पूरा पैसा सोना-चांदी में लगाना समझदारी नहीं है। प्रदीप गुप्ता के अनुसार, एसेट एलोकेशन कभी भी हालिया रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए। ऐसा करना निवेश के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है और गलत समय पर बड़ा नुकसान करा सकता है।

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निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शुभेंदु हरिचंदन बताते हैं कि सोना-चांदी को पोर्टफोलियो में “हेज” यानी सुरक्षा कवच के तौर पर रखना चाहिए, न कि मुनाफे के मुख्य साधन के रूप में। वे कहते हैं कि चांदी का इतिहास काफी अस्थिर रहा है और पिछले 16 वर्षों में इसने करीब 50% बार नेगेटिव रिटर्न दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार से यह पलायन अस्थायी है। जैसे ही बाजार में स्थिरता और ग्रोथ लौटेगी, निवेशक फिर से इक्विटी की ओर रुख करेंगे। वेल्थ मैनेजर्स सलाह देते हैं कि कुल पोर्टफोलियो में सोना-चांदी का हिस्सा 5 से 15% तक ही रखें, ताकि जोखिम संतुलित बना रहे। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।

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