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जशपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठनों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। रायपुर में आयोजित समस्त शिक्षक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगामी 4 अप्रैल 2025 को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक दिवसीय विशाल राष्ट्रीय आंदोलन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन में जशपुर जिले सहित पूरे प्रदेश से हजारों की संख्या में शिक्षक शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
शिक्षकों के इस आक्रोश का मुख्य कारण सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश को माना जा रहा है, जिसके तहत उन शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य कर दी गई है जो इस नियम के लागू होने से पूर्व ही अपनी निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर नियुक्त हो चुके थे। शिक्षक संगठनों का स्पष्ट मत है कि पुराने शिक्षकों पर नई पात्रता शर्तें थोपना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि उनके भविष्य और सेवा सुरक्षा पर भी गहरा संकट पैदा कर रहा है। संगठनों ने मांग की है कि सरकार इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझते हुए पुराने शिक्षकों को इस नियम से छूट प्रदान करे।
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आंदोलन की तैयारियों को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की गई है। छत्तीसगढ़ से लगभग 5000 शिक्षकों को दिल्ली ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। आगामी 22 मार्च को प्रदेश के सभी जिलों में समन्वय बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिसके बाद 25 मार्च को प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक में आंदोलन की अंतिम रूपरेखा और दिल्ली कूच की योजना पर विस्तार से चर्चा होगी। राष्ट्रीय स्तर के इस विरोध प्रदर्शन के पश्चात राज्य स्तर पर भी चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने की योजना है।प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना में छत्तीसगढ़ ने गाड़ा झंडा, शिकायतों के निराकरण और क्रियान्वयन में देश में बना नंबर-1 राज्य
जशपुर जिले के शिक्षक संगठनों ने जिले के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे अपने अधिकारों और सेवा सुरक्षा के लिए इस आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। जिला अध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता, संरक्षक मो. काय्यम अली, महासचिव पंकज बेहरा और सचिव उत्तम कुमार पैंकरा सहित जिले के समस्त ब्लॉक अध्यक्षों और पदाधिकारियों ने एक सुर में कहा है कि यह हजारों शिक्षकों के मान-सम्मान की लड़ाई है।जशपुर जिले की पूरी कार्यकारिणी, जिसमें जिला उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, संगठन मंत्री और प्रवक्ता शामिल हैं, इस मिशन को सफल बनाने के लिए संकल्पित है। संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर न्यायोचित निर्णय नहीं होता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

