पेरिस/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी युद्ध और तनाव की स्थिति आखिरकार खत्म हो गई है। एक बड़े वैश्विक महासंकट को टालते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक ऐतिहासिक युद्ध विराम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस महा-समझौते के लिए फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय महल में एक विशेष रात्रिभोज का आयोजन किया गया था। इस शांति पहल की सफलता पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर खुशी जाहिर करते हुए इसे स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम बताया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा, व्यापारिक जहाजों को मिलेगी मुफ्त राह
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी शुल्क के सभी व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोलने पर सहमत हो गया है। इस फैसले से दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की कीमतों में बड़ी कमी आने और मंदी की मार झेल रहे वैश्विक बाजार को भारी राहत मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। इस पूरी मध्यस्थता प्रक्रिया में ओमान और कुछ अन्य देशों ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसकी पुष्टि खुद ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी की है।
व्हाइट हाउस ने जारी किया वीडियो, तुरंत प्रभाव से लागू हुआ समझौता
अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने इस 14-सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक वीडियो में राष्ट्रपति ट्रंप को फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के साथ बैठकर इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते देखा जा सकता है, जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने वर्चुअली (ऑनलाइन माध्यम) जुड़कर इस पर अपने हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म करने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।
14-सूत्रीय शांति समझौते की मुख्य बातें:
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सैन्य अभियानों पर तुरंत रोक: समझौते के तहत अमेरिका और ईरान लेबनान सहित अपने सभी सैन्य अभियानों को तुरंत रोक देंगे। इसके साथ ही अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और पूर्ण स्थायी समझौता करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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नौसैनिक नाकेबंदी की समाप्ति: अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटा लेगा, जिससे व्यापारिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और बेरोकटोक निकलने का रास्ता मिलेगा।
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ईरान को बड़ी आर्थिक राहत: ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा। साथ ही विदेशों में फंसे ईरान के पैसों को वापस जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अमेरिका ईरान के आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के एक विशेष वित्तीय कार्यक्रम में सहयोग करने के लिए सहमत हुआ है।
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परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी निगरानी: परमाणु मुद्दे पर ईरान ने वैश्विक समुदाय को फिर से भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम के भंडार की कड़ाई से जांच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में की जाएगी।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह ऐतिहासिक समझौता एक मजबूत ढांचे (फ्रेमवर्क) की तरह काम करेगा, जिससे न केवल वाशिंगटन और तेहरान के रिश्तों में सुधार आएगा, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा।


