नई दिल्ली:*
केंद्र सरकार ने नकली और घटिया दवाओं के खतरे को रोकने के लिए औषधि नियमावली, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए दवाओं की पैकेजिंग पर क्यूआर (QR) कोड को अनिवार्य बना दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत टीके, कैंसररोधी दवाएं, मन:प्रभावी औषधियां और सूक्ष्मजीवरोधी दवाओं को अनुसूची एच2 में शामिल किया गया है।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, विनिर्माताओं को अब दवा की प्राथमिक पैकेजिंग पर, या जगह न होने की स्थिति में द्वितीयक पैकेजिंग पर क्यूआर कोड या बारकोड लगाना होगा। यह तकनीकी कदम आपूर्ति शृंखला में सॉफ्टवेयर ऐप के माध्यम से दवाओं के प्रमाणीकरण और सत्यापन को आसान बनाएगा, जिससे उपभोक्ता खुद यह जांच सकेंगे कि दवा असली है या नहीं। सरकार ने उद्योगों को पर्याप्त समय देने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत टीके, कैंसररोधी, मादक और मनोरोग दवाओं से संबंधित प्रावधान 1 जुलाई, 2027 से और रोगाणुरोधी दवाओं से संबंधित प्रावधान 1
जुलाई, 2028 से प्रभावी होंगे। इस उन्नत पहचान ढांचे से बाजार में नकली दवाओं की निगरानी और उन्हें रोकने की क्षमता काफी मजबूत हो जाएगी।
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