छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज भारी गहमागहमी रही, जहाँ विपक्षी दल कांग्रेस ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था और छात्राओं की सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार को जमकर घेरा। सदन की कार्यवाही के दौरान 12वीं बोर्ड के हिंदी पेपर लीक होने की आशंका और बीजापुर के पोर्टा केबिन में छात्राओं के गर्भवती होने के संवेदनशील मामलों ने सियासी पारे को बढ़ा दिया। विपक्ष ने इन दोनों ही विषयों पर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और अंततः सदन की कार्यवाही का बहिष्कार (वॉकआउट) कर दिया।
12वीं बोर्ड पेपर लीक का विवाद
कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने 12वीं बोर्ड के हिंदी पेपर लीक होने का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए पेपर लीक किया गया है। उन्होंने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि अन्य विषयों के पेपरों की गोपनीयता पर भी संदेह जताया और मांग की कि इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच की जाए। दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में कहीं भी पेपर लीक नहीं हुआ है, बल्कि एक छात्र संगठन द्वारा रात के समय कुछ प्रश्नों को व्हाट्सएप पर वायरल कर भ्रम फैलाया गया है। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल को इस पूरे घटनाक्रम की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
बीजापुर पोर्टा केबिन कांड पर तीखी बहस
सदन में सबसे अधिक तनाव बीजापुर जिले के गंगालूर पोर्टा केबिन में छात्राओं के गर्भवती होने के मामले पर दिखा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित अन्य कांग्रेस विधायकों ने इस मुद्दे पर काम रोककर चर्चा करने के लिए स्थगन प्रस्ताव लाया। विपक्षी विधायकों का आरोप था कि आदिवासी बच्चियों के साथ लगातार ऐसी दर्दनाक घटनाएं हो रही हैं और प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती में जुटा है। विधायक उमेश पटेल ने दावा किया कि छात्राओं को हॉस्टल से बाहर कर दिया गया है, जबकि अन्य विधायकों ने सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव पर सरकार को घेरा।
सरकार का पक्ष और विपक्ष का बहिर्गमन
इन गंभीर आरोपों पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष के आरोप पूरी तरह निराधार हैं और सरकार किसी भी दोषी को नहीं बचा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि संबंधित बच्चियां वर्तमान में वहां नहीं पढ़ रही हैं और स्थानीय कलेक्टर के मार्गदर्शन में जांच जारी है। हालांकि, जब विधानसभा की आसंदी ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, तो नाराज कांग्रेस विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष का कहना था कि सरकार इतने संवेदनशील मामले पर चर्चा से भाग रही है, जबकि सरकार का तर्क था कि मामले की नियमानुसार जांच की जा रही है।

