रायपुर।
प्रदेश में पंजीकृत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था सरकार के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार कुल पंजीकृत शिक्षकों में से केवल लगभग एक तिहाई शिक्षक ही नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। शेष शिक्षक या तो तकनीकी दिक्कतों का हवाला दे रहे हैं या फिर प्रणाली से असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार राज्य में 72 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों ने ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में पंजीयन तो करा लिया है, लेकिन वास्तविक उपस्थिति दर्ज करने वालों का प्रतिशत महज़ 24 के आसपास ही सिमट गया है। कुछ जिलों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां ऑनलाइन उपस्थिति 3 से 5 प्रतिशत तक ही दर्ज की गई है।
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19 जनवरी को ऑनलाइन उपस्थिति जिला-वार स्थिति
जिला – शिक्षकोंसंख्या – ऑनलाइन उपस्थिति %
मुंगेली – 4041 – 2.3%
सक्ती – 4385 – 3.2%
गरियाबंद – 4970 – 5.2%
बिलासपुर – 8686 – 6.6%
दुर्ग – 5863 – 7.4%
कोरबा – 6806 – 7.5%
कबीरधाम – 5455 – 7.6%
बेमेतरा – 5080 – 8.4%
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी – 2802 – 10.4%
बलौदाबाजार – 6722 – 11.3%
रायपुर – 8474 – 13.5%
नारायणपुर – 1698 – 16.5%
सारंगढ़-बिलाईगढ़ – 4564 – 17.8%
धमतरी – 5775 – 20%
बस्तर – 7638 – 20%
जांजगीर-चांपा – 7833 – 20.6%
महासमुंद – 6721 – 23.5%
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – 2632 – 25.5%
कोरिया – 2117 – 30.7%
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – 3116 – 32.2%
रायगढ़ – 8154 – 32.8%
बलरामपुर – 6729 – 33.6%
बालोद – 6043 – 34.3%
सुकमा – 2371 – 34.4%
कोंडागांव – 8718 – 34.7%
बीजापुर – 2277 – 35.5%
जांगीर-चांपा (ग्रामीण) – 5685 – 37.1%
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई – 2343 – 38.2%
सूरजपुर – 7463 – 40.7%
कोण्डागांव (द्वितीय सूची) – 6864 – 41.9%
राजनांदगांव – 5444 – 49.9%
दंतेवाड़ा – 2615 – 50%
सूरगुजा – 7517 – 51.3%
सबसे कम ऑनलाइन उपस्थिति मुंगेली जिले में दर्ज की गई है, जहां मात्र 2.3 प्रतिशत शिक्षक ही ऑनलाइन उपस्थित पाए गए। वहीं सक्ती जिले में यह आंकड़ा 3.2 प्रतिशत रहा। दूसरी ओर कुछ जिलों में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति देखने को मिली है, लेकिन समग्र रूप से प्रदेश की तस्वीर संतोषजनक नहीं मानी जा रही।
शिक्षा विभाग ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए 70 प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों का पालन नहीं होने पर विभाग की ओर से तीन दिन का अल्टीमेटम भी दिया गया है। विभाग का कहना है कि ऑनलाइन उपस्थिति से शिक्षकों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और स्कूलों की नियमित निगरानी संभव हो सकेगी।
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हालांकि शिक्षक संगठनों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। संगठनों का कहना है कि कई स्कूलों में नेटवर्क की समस्या, ऐप की तकनीकी खामियां और अतिरिक्त कार्यभार के कारण शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने ऑनलाइन व्यवस्था के स्थान पर वैकल्पिक और व्यवहारिक समाधान की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग के अल्टीमेटम के बाद ऑनलाइन उपस्थिति में सुधार आता है या यह व्यवस्था विवाद और असंतोष का कारण बनी रहती है।

