: इस बार रंगों के त्योहार होली से ठीक पहले मंगलवार को लगने जा रहा चंद्र ग्रहण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रख रहा है। ग्रहण के चलते होली से जुड़े मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी और सूतक काल के दौरान देशभर के प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।
ग्रहण का समय और सूतक काल
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:20 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा। ग्रहण का स्पर्श दोपहर 03:20 बजे होगा, जबकि इसका मोक्ष शाम 06:47 बजे होगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण से तीन पहर (यानी 9 घंटे) पहले भोजन का त्याग करना शुभ माना जाता है, हालांकि बालक, वृद्ध और रोगियों को इस नियम में रियायत दी गई है।
बचाव के उपाय और सावधानियां
ज्योतिषाचार्य पंडित रजनी कांत मिश्रा के अनुसार, ग्रहण की हानिकारक विकिरणों से बचाव के लिए भोज्य पदार्थों में कुशा या तुलसी दल डालना अनिवार्य है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल के दौरान घर के भीतर रहकर भजन-कीर्तन करने की सलाह दी गई है, ताकि गर्भस्थ शिशु पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
स्नान और दान का महत्व
ग्रहण की समाप्ति के बाद शुद्धि का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ग्रहण समाप्ति के पश्चात बिना स्नान किए देव-पूजा या कोई भी नित्य कर्म नहीं करना चाहिए। स्नान के बाद ही शरीर और मन की पूर्ण शुद्धि मानी जाती है। ग्रहण के शुभ फलों के लिए सामर्थ्य अनुसार श्वेत वस्तुओं जैसे चावल, दूध और चांदी का दान करना अत्यंत फलदायी बताया गया है।

