छत्तीसगढ़ में तीन दिन ठप रहेगा सरकारी कामकाज, 4.5 लाख कर्मचारी 29 से 31 दिसंबर तक हड़ताल पर
रायपुर। नए साल के साथ ही छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज की तस्वीर पूरी तरह बदलने जा रही है। 1 जनवरी 2026 से जिले के सभी सरकारी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया है। कलेक्टर कार्यालय सहित सभी प्रमुख विभागों में अब फाइलों और शासकीय पत्राचार का संचालन केवल डिजिटल माध्यम से होगा। बिना विभाग प्रमुख की अनुमति के कोई भी फिजिकल फाइल संचालित नहीं की जा सकेगी।
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राज्य सरकार के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है। मुख्य सचिव ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं। पिछले करीब एक साल से प्रदेश में ई-ऑफिस प्रणाली को लागू करने की तैयारी चल रही थी, जो अब जाकर जमीन पर उतरने जा रही है। शासन स्तर पर जिन प्रकरणों में स्वीकृति या अनुमोदन की आवश्यकता होगी, वे अब केवल ई-ऑफिस फाइल के माध्यम से ही भेजे जाएंगे। वहीं सामान्य पत्राचार के लिए ई-ऑफिस की रिसीप्ट प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।
इस व्यवस्था के लागू होने से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ने की उम्मीद है। अब यह आसानी से पता चल सकेगा कि कोई फाइल किस अधिकारी के पास कितने समय से लंबित है। इससे फाइलों को अनावश्यक रूप से रोकने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और जवाबदेही भी तय होगी। फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक ले जाने में लगने वाला समय भी खत्म हो जाएगा, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी।
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ई-ऑफिस सिस्टम के जरिए डिजिटल सिग्नेचर से ही फाइलों का निपटारा किया जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। कागजी फाइलों के नष्ट होने, गुम होने या खराब होने की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। साथ ही कागज की खपत कम होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह व्यवस्था शासन के कामकाज को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। ई-ऑफिस की खास बात यह है कि अधिकारी मुख्यालय से बाहर रहने या दौरे पर होने की स्थिति में भी फाइलों का निपटारा कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर अवकाश के दौरान भी ऑनलाइन माध्यम से कार्य संभव होगा।
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जानकारों का मानना है कि ई-ऑफिस लागू होने के बाद अब फाइलें महीनों तक ठंडे बस्ते में नहीं पड़ी रहेंगी। हर आवेदन और प्रस्ताव की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी, जिससे आम जनता से जुड़े मामलों का निराकरण तय समय सीमा में हो सकेगा। यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि सुशासन की सोच को भी मजबूत करेगी।
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