मौसम
मकर संक्रांति के साथ सूर्य के उत्तरायण होते ही जहां छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड से राहत मिलने की उम्मीद की जा रही थी, वहीं कुदरत ने इस बार सारा गणित ही उलट कर रख दिया है। आज 15 जनवरी को जब प्रदेश में सूरज की तपिश बढ़ने और दिन बड़े होने की शुरुआत होनी थी, तब छत्तीसगढ़ के पांचों संभाग एक गहरे ‘डीप फ्रीजर’ में तब्दील हो गए हैं। यह स्थिति इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि खगोलीय गणना के अनुसार आज से ठंड की विदाई का समय शुरू हो जाता है, लेकिन धरातल पर सरगुजा से लेकर बस्तर तक बर्फीली हवाओं का तांडव जारी है।
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इस साल की 15 जनवरी ने पिछले 5 सालों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। साल 2021 से 2025 के बीच इसी तारीख को लोग अपने गर्म कपड़े समेटने की तैयारी शुरू कर देते थे, लेकिन आज आलम यह है कि सूरज की सीधी किरणों के बावजूद मैदानी इलाकों में भी गलन कम नहीं हो रही है। राजधानी रायपुर और दुर्ग में सुबह की धूप बेअसर साबित हो रही है, जबकि महासमुंद की ओर से आने वाली ठंडी हवाओं ने ‘विंड चिल फैक्टर’ को इतना बढ़ा दिया है कि घर के अंदर भी ठिठुरन महसूस की जा रही है।
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सबसे ज्यादा असर उत्तर छत्तीसगढ़ में देखा जा रहा है, जिसे इस वक्त ‘मिनी शिमला’ कहा जा रहा है। अंबिकापुर, जशपुर और बलरामपुर के ऊंचे इलाकों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यहां स्थानीय लोग एक पुरानी कहावत दोहराते हुए कह रहे हैं कि “इस बार माघ की ठंड बाघ की तरह झपट्टा मार रही है,” क्योंकि सूरज की गर्मी बढ़ने के बजाय ठंड और अधिक आक्रामक होकर लौट रही है। पहाड़ों पर पाला गिरने की स्थिति है, तो वहीं मैदानी इलाकों में 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही उत्तरी हवाएं जनजीवन को थामे हुए हैं।
मौसम विभाग के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इस साल की ठंड महज एक अहसास नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। पिछले पांच वर्षों के रुझानों पर नजर डालें तो 15 जनवरी की तारीख को रायपुर और मैदानी इलाकों का न्यूनतम तापमान आमतौर पर 15 डिग्री से. से 17 डिग्री से. के बीच रहता था, जिससे मकर संक्रांति के बाद ठंड की विदाई का संकेत मिलता था। लेकिन 2026 में कुदरत ने इस पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया है; आज राजधानी का पारा 11 डिग्री से. के करीब पहुंच गया है, जो पिछले आधे दशक में इस विशेष तिथि के लिए सबसे कम दर्ज किया गया है।
उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में तो स्थिति और भी चौंकाने वाली है, जहां पिछले पांच सालों में 15 जनवरी के आसपास तापमान 8 से 10 डिग्री के बीच स्थिर रहता था, वहीं इस साल यह 3-4 डिग्री के पास गोता लगा रहा है। आंकड़ों का यह विश्लेषण स्पष्ट करता है कि उत्तरी हवाओं और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के दुर्लभ मेल ने इस साल जनवरी के मध्य में वह रिकॉर्ड तोड़ ठिठुरन पैदा की है, जिसे छत्तीसगढ़ के लोगों ने 2021 के बाद से अब तक अनुभव नहीं किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ और जेट स्ट्रीम के खास तालमेल की वजह से ठंड का यह स्पेल लंबा खिंच गया है। दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा में भी घने जंगलों की नमी के कारण रातें असामान्य रूप से सर्द बनी हुई हैं। 15 जनवरी का यह नया मौसम चक्र न केवल आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना है, बल्कि इसने खेती-किसानी की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि उत्तरायण के बाद का यह असामान्य तापमान फसलों के परिपक्व होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, प्रदेश में अलाव ही एकमात्र सहारा बने हुए हैं और ऐसा लग रहा है कि छत्तीसगढ़ में ‘विंटर का दूसरा और अधिक सर्द दौर अब शुरू हुआ है।

