छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘भाड़ा नियंत्रण संशोधन विधेयक’ पारित, बदल जाएगी किरायेदारी की सूरत
विशेष संवाददाता | रायपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के अंतर्गत आदिम जाति विकास विभाग (ट्रायबल डिपार्टमेंट) में छात्रावास अधीक्षकों और चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों के मूल पदस्थापना स्थल से अन्य जगहों पर किए जाने वाले अटैचमेंट (संलग्नीकरण) का मुद्दा गूंजा। विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगड़े द्वारा पूछे गए ध्यानाकर्षण प्रश्न का लिखित जवाब देते हुए प्रदेश के आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है। मंत्री के दो-टूक जवाब से साफ हो गया है कि जिले में पिछले दो सत्रों के दौरान विभाग द्वारा नियमों को ताक पर रखकर कोई भी अटैचमेंट नहीं किया गया है।
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पिछले दो सत्रों में एक भी अधीक्षक या कर्मचारी नहीं बदला गया
सदन में विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगड़े ने सत्र 2024-25 से सत्र 2025-26 तक की अवधि में मूल पदस्थापना से हटाकर अन्य छात्रावासों में व्यवस्था के तहत भेजे गए अधीक्षकों और कर्मचारियों की नामजद सूची मांगी थी।
इस पर लिखित उत्तर देते हुए आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने बताया कि प्रश्न्याधीन अवधि (सत्र 2024-25 से सत्र 2025-26) में जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ में आयुक्त, आदिम जाति विकास विभाग द्वारा किसी भी छात्रावास अधीक्षक एवं कर्मचारी की मूल पदस्थापना से अन्य छात्रावास में व्यवस्था या अटैचमेंट नहीं किया गया है। विभाग में पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू है, जिसके कारण सूची जारी करने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता।
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मूल पदस्थापना से मनमाने तरीके से हटाने का प्रावधान नहीं
विधायक ने नियमों को लेकर भी एक गंभीर सवाल उठाया था कि क्या जिला आयुक्त द्वारा ट्रायबल विभाग के अधीक्षकों और अन्य चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना से हटाकर कहीं भी संलग्न (अटैच) किया जा सकता है?
इस नीतिगत सवाल पर आदिम जाति विकास मंत्री ने सदन में स्पष्ट रूप से ‘जी नहीं’ कहकर जवाब दिया। सरकार के इस रुख से यह स्पष्ट है कि किसी भी कर्मचारी या अधीक्षक को बिना किसी ठोस प्रशासनिक कारण या नियमों के विपरीत जाकर मनमाने तरीके से मूल पदस्थापना स्थल से हटाकर दूसरी जगह अटैच नहीं किया जा सकता।



