नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने देश की सुरक्षा और जरूरतों को लेकर एक बड़ा ‘एक्शन प्लान’ पेश किया है। केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय बैठक में यह साफ कर दिया गया है कि बाहरी संकट का असर भारत की बिजली और ईंधन सप्लाई पर नहीं पड़ेगा। सरकार ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि देश के पास कोयले, पेट्रोल और डीजल का इतना भंडार है कि किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सकता है।
बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयला मंत्रालय ने पावर प्लांटों में चौबीस दिनों का एडवांस स्टॉक जमा कर लिया है। साथ ही, खदानों में भी भारी मात्रा में कोयला आरक्षित है ताकि बिजली संकट की कोई भी गुंजाइश न रहे। पेट्रोलियम मंत्रालय ने जनता से अपील की है कि वे पेट्रोल पंपों या गैस एजेंसियों पर भीड़ न लगाएं और घबराहट में आकर तेल या सिलेंडर जमा न करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि गैस सिलेंडर की डिलीवरी सामान्य रूप से जारी रहेगी और सप्लाई में कोई बाधा नहीं आएगी।
विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार ने बताया कि अब तक सत्रह सौ से अधिक नाविकों को सुरक्षित घर वापस लाया जा चुका है। संकट वाले इलाकों में फंसे अन्य नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय दूतावास दिन-रात काम कर रहे हैं। वहीं, देश के भीतर जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। देशभर में चार हजार से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की गई है और गड़बड़ी करने वाले गैस वितरकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि संकट के समय में आम आदमी को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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