होटल-रेस्तरां में खाना होगा सस्ता! अब बिल में ‘LPG शुल्क’ या ‘गैस सरचार्ज’ जोड़ना पड़ेगा भारी; सरकार ने सख्त चेतावनी के साथ जारी की नई एडवाइजरी
रायपुर | 27 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए 1 अप्रैल 2026 से दैनिक जीवन से जुड़े नियमों में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार की नई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी के तहत अब घर-घर से कचरा संग्रहण की पूरी व्यवस्था को नया रूप दिया जाएगा। अब तक केवल नीले और हरे डिब्बे का अंतर समझने वाले लोगों को अब चार अलग-अलग श्रेणियों में कचरा बांटकर सफाई मित्रों को देना होगा। इस नई व्यवस्था में गीले और सूखे कचरे के अलावा सेनेटरी वेस्ट, जैसे कि डायपर और सैनिटरी पैड, तथा डोमेस्टिक हैजर्ड वेस्ट, जिसमें पुरानी दवाएं, बैटरी और पेंट जैसी वस्तुएं शामिल हैं, उन्हें पूरी तरह अलग रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस नए नियम के पालन को लेकर नगर निगम के सामने संसाधनों और बजट की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वर्तमान में निगम के बेड़े में करीब 255 गाड़ियां कचरा उठाने का काम कर रही हैं, लेकिन ये सभी गाड़ियां फिलहाल मिक्स कचरा ही उठा रही हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा गाड़ियों में चार तरह के कचरे के लिए पार्टिशन किया जाता है, तो उनकी लोडिंग क्षमता काफी कम हो जाएगी, जिससे कचरा उठाने के लिए ट्रिप की संख्या बढ़ानी पड़ेगी। अनुमान है कि इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने और आईटी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने के लिए निगम पर लगभग 15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आएगा, जो पहले से ही बजट की कमी से जूझ रहे प्रशासन के लिए एक कठिन कार्य होगा।
कचरा प्रबंधन के अलावा, सामाजिक आयोजनों को लेकर भी सरकार ने कड़े रुख के संकेत दिए हैं। नए नियमों के मुताबिक, यदि आप अपने घर या किसी निजी स्थान पर शादी, जन्मदिन या कोई अन्य समारोह आयोजित करते हैं और उसमें 100 से अधिक मेहमान शामिल होने वाले हैं, तो आयोजन के कम से कम तीन दिन पहले स्थानीय निगम या पालिका को इसकी लिखित सूचना देनी होगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बड़े आयोजनों से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन पहले से तय किया जा सके। बिना सूचना दिए भीड़ जुटाने और कचरा फैलाने पर अब भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
राजधानी रायपुर के पुराने डेटा बताते हैं कि आज भी कई वार्डों में मिक्स कचरा ही डंपिंग यार्ड तक पहुँच रहा है, जिससे ‘सोर्स सेग्रीगेशन’ का लक्ष्य अधूरा बना हुआ है। लाल और काले डिब्बे की अवधारणा को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन को अब बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान और घर-घर जाकर प्रशिक्षण देने की जरूरत होगी। बिना जन-भागीदारी और सख्त जुर्माने के इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाना निगम के लिए किसी दुर्गम पहाड़ पर चढ़ने जैसा होगा। इसी प्रशासनिक सख्ती के बीच एक अन्य मामले में कलेक्टर ने उस क्लर्क पर भी कड़ा एक्शन लिया है जिसने फर्जी तरीके से ‘लेक्चरर’ बनकर 8 महीने तक करीब 13 लाख रुपये का वेतन डकार लिया था, जो यह साफ करता है कि अब शासन की नजर हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर बनी हुई है।
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