रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग, अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों, आश्रमों और आवासीय संस्थानों के सुचारू संचालन को लेकर शासन स्तर पर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है।
विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमल प्रीत सिंह को एक अर्धशासकीय (D.O.) पत्र लिखा है। इस पत्र में अनुरोध किया गया है कि ट्राइबल विभाग द्वारा अपनी वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने तक, इन आवासीय संस्थाओं में वर्तमान में कार्यरत शिक्षा विभाग के संलग्न (attached) शिक्षकों व कर्मचारियों को यथावत कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाए।
1136 आश्रम शालाओं में अधीक्षक के पद रिक्त प्रमुख सचिव द्वारा भेजे गए पत्र में विभागीय जमीनी स्थितियों का हवाला दिया गया है। पत्र के अनुसार, प्रदेश भर की 1136 आश्रम शालाओं में वर्तमान में अधीक्षक के पद रिक्त हैं। ऐसे में यदि शिक्षा विभाग से संलग्न शिक्षकों को अचानक मूल विभाग में वापस बुला लिया जाता है, तो इन संस्थाओं का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
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1856 शिक्षकों व कर्मचारियों पर व्यवस्था की जिम्मेदारी छात्रावासों, आश्रमों, प्रयास आवासीय विद्यालयों, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और क्रीड़ा परिसरों के निर्बाध व व्यवस्थित संचालन के लिए शिक्षा विभाग के कुल 1856 शिक्षकों एवं कर्मचारियों को छात्रावास अधीक्षक तथा अन्य पदों का प्रभार सौंपा गया है। ट्राइबल विभाग की मंशा है कि जब तक विभाग में अपनी स्थायी या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बन जाती, तब तक इन शिक्षकों की सेवाएं पूर्ववत जारी रखी जाएं ताकि छात्रों की पढ़ाई और आवास व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
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