नई दिल्ली: देश में दूरसंचार सेवाओं के भविष्य को नई दिशा देते हुए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने अंतरराष्ट्रीय मोबाइल दूरसंचार (IMT) के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी की अपनी ताजा सिफारिशें सरकार को सौंप दी हैं। दूरसंचार विभाग के अनुरोध पर तैयार इन सिफारिशों में ट्राई ने 600 मेगाहर्ट्ज से लेकर 26 गीगाहर्ट्ज तक के विभिन्न आवृत्ति बैंडों में उपलब्ध संपूर्ण स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए रखने का सुझाव दिया है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि यह नीलामी 20 वर्षों की वैधता अवधि के लिए होनी चाहिए और इसमें ‘एक साथ कई दौर की नीलामी’ (SMRA) की मौजूदा प्रक्रिया को ही बरकरार रखा जाना चाहिए।
इस बार की सिफारिशों में सबसे खास बात नए सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार में प्रवेश को आसान बनाना है। ट्राई ने नए खिलाड़ियों के लिए नेट-वर्थ की सीमा को 100 करोड़ रुपये से घटाकर 50 करोड़ रुपये प्रति सर्कल करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्रों के लिए इसे और कम कर 25 करोड़ रुपये करने की बात कही गई है। इसके अलावा, नियामक ने दूरसंचार विभाग को उन कंपनियों का स्पेक्ट्रम वापस लेने की सलाह दी है जो दिवालियापन की प्रक्रिया से गुजर रही हैं, ताकि उस कीमती संसाधन का उपयोग आगामी नीलामी में किया जा सके।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार के लिए ट्राई ने एक अनूठी प्रोत्साहन योजना भी सुझाई है। इसके तहत, टेलीकॉम कंपनियों को नीलामी की लागत में 10 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है, बशर्ते वे इस राशि का उपयोग उन क्षेत्रों में नए बेस स्टेशन और 4जी/5जी टावर लगाने के लिए करें जहाँ अभी नेटवर्क की पहुंच नहीं है। पर्यावरण और तकनीकी कुशलता को ध्यान में रखते हुए, ट्राई ने 6 गीगाहर्ट्ज के ऊपरी बैंड को फिलहाल नीलामी से बाहर रखने और इसे भविष्य के लिए आरक्षित रखने की सिफारिश की है।
स्पेक्ट्रम की कीमतों के मामले में भी ट्राई ने विस्तृत योजना पेश की है। विभिन्न सर्किलों के लिए आरक्षित मूल्य तय किए गए हैं, जिसमें दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो क्षेत्रों के लिए दरें ऊंची रखी गई हैं। कंपनियों को भुगतान में राहत देने के लिए 600 मेगाहर्ट्ज बैंड में चार साल की मोहलत (Moratorium) का विकल्प भी दिया गया है, ताकि वे शुरुआत में नेटवर्क बनाने पर निवेश कर सकें। इन सिफारिशों का उद्देश्य एक ऐसा प्रतिस्पर्धी माहौल बनाना है जिससे न केवल डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत हो, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं मिल सकें।

