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जनजातीय कार्य मंत्रालय ने देश के जनजातीय समुदायों और क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए एक नई और आधुनिक पहल शुरू की है। राज्यसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री द्रुगदास उइके ने बताया कि मंत्रालय ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम’ (NSTFDC) के माध्यम से कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) साझेदारी का विस्तार कर रहा है। इसके तहत एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (EMRS) को उन्नत बनाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड, ओएनजीसी (ONGC) और भारत पेट्रोलियम जैसी प्रमुख महारत्न कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।
इन औद्योगिक दिग्गजों के साथ हुए करारों का मुख्य उद्देश्य जनजातीय छात्रों को भविष्य की तकनीक से जोड़ना है। इस सहयोग के माध्यम से विद्यालयों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं (Space Labs) की स्थापना की जा रही है और डिजिटल शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह पहल केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों की क्षमता निर्माण (Capacity Building) पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि शिक्षण की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।
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मंत्रालय की कार्यान्वयन एजेंसियां, एनएसटीएफडीसी और एनईएसटीएस (NESTS), यह सुनिश्चित कर रही हैं कि ये सभी प्रयास पूरी तरह से परिणाम-उन्मुख हों। इन कार्यक्रमों को इस तरह तैयार किया गया है कि ईएमआरएस के छात्रों की शैक्षणिक नींव और डिजिटल दक्षता इतनी मजबूत हो जाए कि उन्हें उच्च शिक्षण संस्थानों और पेशेवर क्षेत्रों में करियर बनाने में आसानी हो। एनईएसटीएस द्वारा इन हस्तक्षेपों की निरंतर निगरानी की जा रही है ताकि जनजातीय छात्रों की सफलता दर और बड़े संस्थानों में उनके प्लेसमेंट में सुधार लाया जा सके।
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प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टीकरण देते हुए मंत्री जी ने सूचित किया कि वर्तमान में अलग से किसी ‘सीएसआर-ईएमआरएस सेल’ की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि एनएसटीएफडीसी पहले से ही इन परियोजनाओं के लिए नोडल एजेंसी के रूप में सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। यह पूरी योजना जनजातीय छात्रों को शिक्षा के माध्यम से मुख्यधारा के पेशेवर क्षेत्रों में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।

