साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरा रहा। इस पूरे साल में अगर किसी एक मुद्दे ने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल मचाई, तो वह था **स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)**। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर शुरू हुआ यह मामला बिहार से निकलकर पूरे देश में सियासी बहस का केंद्र बन गया। जहां सत्ता पक्ष ने इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ा, वहीं विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर “वोट चोरी” करार दिया।
**बिहार से शुरू हुआ SIR का विवाद**
जून 2025 में भारतीय निर्वाचन आयोग ने बिहार में SIR की प्रक्रिया शुरू की। विधानसभा चुनाव से पहले बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया गया। 30 सितंबर 2025 को जारी अंतिम वोटर लिस्ट में करीब **65 लाख नाम हटाए जाने** के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए गरीबों, दलितों, मुसलमानों और प्रवासी मजदूरों को वोटर लिस्ट से बाहर किया गया। राहुल गांधी ने बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकालते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। RJD और कांग्रेस ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं भी दायर की गईं, हालांकि विपक्ष को वहां से कोई बड़ी राहत नहीं मिल सकी।
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**बीजेपी का जवाब: घुसपैठ रोकने के लिए जरूरी है SIR**
वहीं बीजेपी ने SIR को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए इसे जरूरी कदम बताया। पार्टी का कहना था कि बिहार के सीमांचल इलाकों में अवैध घुसपैठ के कारण वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां हुई हैं। खासतौर पर बांग्लादेश से सटे इलाकों में जनसंख्या संतुलन बिगड़ने का आरोप लगाया गया।
15 अगस्त 2025 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि देश में सोची-समझी साजिश के तहत डेमोग्राफी बदली जा रही है और घुसपैठिए युवाओं की रोज़ी-रोटी छीन रहे हैं। पीएम के इस बयान के बाद SIR पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया।
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**बंगाल में पहुंचते ही भड़की सियासत**
27 अक्टूबर 2025 को चुनाव आयोग ने SIR के दूसरे चरण का ऐलान किया, जिसमें पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों को शामिल किया गया। इसके बाद बंगाल में राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया।
पश्चिम बंगाल की बड़ी आबादी बांग्लादेश से सटे इलाकों में रहती है और राज्य में मुस्लिम आबादी करीब 34 प्रतिशत है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने अवैध घुसपैठियों को वोटर बनाकर चुनावी फायदा उठाया है। वहीं, टीएमसी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केंद्र सरकार की साजिश बताया।
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**ममता बनर्जी का पलटवार**
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कृष्णानगर की रैली में उन्होंने कहा कि SIR के नाम पर महिलाओं और गरीबों के अधिकार छीने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए तो जनता चुप नहीं बैठेगी।
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर SIR का विरोध किया, लेकिन अंतिम दिन खुद ही एन्यूमरेशन फॉर्म भरकर जमा कर दिया।
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**SIR के दौरान BLO की मौतें बनी चिंता का विषय**
SIR के दूसरे चरण के दौरान एक गंभीर मामला भी सामने आया। महज 22 दिनों में देश के 7 राज्यों में **25 से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर्स की मौत** हो गई। अत्यधिक काम का दबाव, लंबी ड्यूटी और मानसिक तनाव को इसकी मुख्य वजह बताया गया। कई जगह कर्मचारियों पर दबाव और धमकी के आरोप भी लगे।
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साल 2025 में SIR सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहा, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बन गया। बिहार से शुरू होकर बंगाल तक पहुंचा यह मुद्दा आने वाले चुनावों की दिशा तय करता नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि 2026 के विधानसभा चुनावों में SIR जनता का भरोसा जीत पाता है या फिर यह राजनीतिक टकराव का सबसे बड़ा कारण बनकर रह जाता है।

