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रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में हाथियों की अप्राकृतिक मृत्यु और हाथियों के कारण होने वाली जनहानि का मुद्दा उठा । पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वन मंत्री केदार कश्यप ने राज्य की स्थिति स्पष्ट की। भूपेश बघेल ने यह सवाल उठाया था कि क्या छत्तीसगढ़ में देश के मात्र 1% हाथी होने के बावजूद हाथियों से होने वाली मौतों में राज्य की हिस्सेदारी 15% है, जिसे वन मंत्री ने पूरी तरह से गलत बताया।
इलेक्ट्रोक्यूशन यानी करंट लगने से हाथियों की मौत के गंभीर विषय पर स्पष्टीकरण देते हुए वन मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में करंट से 13 नहीं बल्कि 10 हाथियों की मृत्यु हुई है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार आरोपियों के विरुद्ध वन्यप्राणी अधिनियम 1972 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है और संबंधित प्रकरणों में कोर्ट चालान भी पेश कर दिया गया है। विस्तृत जानकारी के लिए उन्होंने संलग्न प्रपत्र का हवाला दिया।
हाथियों के हमलों से होने वाले नुकसान और उसके मुआवजे को लेकर भी सरकार ने अपना पक्ष रखा।
वन मंत्री ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में हाथी हमलों से हुई फसल क्षति और जनहानि मुआवजे का कोई भी प्रकरण वर्तमान में लंबित नहीं है। सरकार के अनुसार सभी पात्र मामलों का निपटारा कर दिया गया है। यह जवाब राज्य में मानव-हाथी द्वंद्व के प्रबंधन और प्रभावितों को दी जाने वाली राहत के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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