छत्तीसगढ़ में स्कूली छात्रवृत्ति की ऑनलाइन प्रक्रिया इस वर्ष एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बनकर सामने आई है। समय सीमा नजदीक होने के बावजूद बड़ी संख्या में छात्रों का पंजीकरण पूरा नहीं हो पा रहा है। सवाल यह नहीं है कि छात्र या स्कूल लापरवाह हैं, बल्कि यह है कि आखिर छात्रवृत्ति का ऑनलाइन काम सुचारु रूप से क्यों नहीं हो पा रहा।
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तकनीकी समस्याओं में उलझी छात्रवृत्ति प्रक्रिया
जमीनी हकीकत यह है कि छात्रवृत्ति पोर्टल पर लगातार तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। कई स्कूलों का कहना है कि पोर्टल बार-बार स्लो हो जाता है या लॉग-इन के बाद डाटा सेव नहीं होता। आधार लिंकिंग, बैंक खाते की पुष्टि और केवाईसी सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं अलग-अलग प्लेटफॉर्म से जुड़ी होने के कारण एक छोटी गलती पूरी एंट्री को रोक देती है।
आधार, बैंक और दस्तावेजों का तालमेल नहीं
स्कूलों के अनुसार बड़ी संख्या में बच्चों के आधार कार्ड में नाम, जन्मतिथि या पिता के नाम की वर्तनी बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही है। इस कारण सिस्टम स्वतः आवेदन को रिजेक्ट कर देता है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के बैंक खाते पुराने हैं, जिनका केवाईसी अपडेट नहीं हुआ है। आधार अपडेट और बैंक सुधार के लिए पालकों को बार-बार शहर जाना पड़ रहा है, जिससे प्रक्रिया और धीमी हो रही है।
नेटवर्क और संसाधनों की कमी भी बड़ी वजह
ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बड़ी समस्या बनी हुई है। कमजोर नेटवर्क के कारण ऑनलाइन फॉर्म भरना और दस्तावेज अपलोड करना समयसाध्य हो जाता है। कई स्कूलों में पर्याप्त कंप्यूटर या प्रशिक्षित ऑपरेटर नहीं हैं, जबकि एक-एक स्कूल में सैकड़ों छात्रों की एंट्री करनी होती है।
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स्कूलों का पक्ष क्या कहता है
शिक्षकों और संस्था प्रमुखों का कहना है कि वे नियमित रूप से बच्चों और पालकों की मदद कर रहे हैं। छुट्टी के बाद भी शिक्षक एंट्री कार्य में लगे हुए हैं, लेकिन तकनीकी बाधाओं के चलते प्रगति धीमी है। स्कूलों का मानना है कि इस समस्या को उनकी कार्यक्षमता से जोड़ना गलत है, क्योंकि पोर्टल और तकनीकी सिस्टम उनके नियंत्रण में नहीं है।
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समाधान क्या हो सकता है
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का सुझाव है कि छात्रवृत्ति पोर्टल को सरल बनाया जाए, दस्तावेज सत्यापन में लचीलापन रखा जाए और समय सीमा बढ़ाई जाए। साथ ही, बैंक और आधार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए स्कूल स्तर पर विशेष सहायता शिविर लगाए जाएँ, ताकि छात्रों और पालकों को भटकना न पड़े।
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फिलहाल छात्रवृत्ति की ऑनलाइन प्रक्रिया में आ रही दिक्कतें यह बताती हैं कि यह केवल किसी एक स्कूल या शिक्षक की समस्या नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। यदि तकनीकी अव्यवस्थाओं को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा।

