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रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। विभाग की मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन को सूचित किया है कि प्रदेश में शाला त्यागी यानी स्कूल छोड़ने वाली और शिक्षा से वंचित बालिकाओं की जिलावार जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है। यह जवाब विधायक श्रीमती शेषराज हरवंश द्वारा पूछे गए उस सवाल के संदर्भ में आया है जिसमें उन्होंने वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए जिलेवार आंकड़ों की मांग की थी।
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सदन में पूछे गए इस प्रश्न के माध्यम से यह भी जानने की कोशिश की गई थी कि क्या ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत इन बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसी विशेष वित्तीय सहायता या योजना से जोड़ा गया है। इस पर विभागीय स्पष्टीकरण देते हुए मंत्री ने बताया कि क्योंकि डेटा विभाग के पास उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऐसी बालिकाओं की संख्या शून्य मानी गई है।
हालांकि, विभाग ने यह स्पष्ट किया कि मिशन शक्ति के अंतर्गत संचालित ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 में स्कूल शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कुल 2216 विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता लाना और ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत उन बच्चियों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना था जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी थी। विभाग के दावों के मुताबिक इन जागरूकता अभियानों और रैलियों में अब तक कुल 1,09,447 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है।
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मंत्री ने आगे बताया कि विभाग का मुख्य फोकस केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि लिंग चयन और भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए भी कार्ययोजना तैयार की गई है। विभिन्न कार्यशालाओं और प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से समुदाय को बालिकाओं की सुरक्षा और उनके अस्तित्व के प्रति संवेदनशील बनाया जा रहा है। भले ही विभाग के पास स्कूल छोड़ने वाली बच्चियों का सटीक आंकड़ा न हो, लेकिन सरकारी स्तर पर जागरूकता अभियानों को ही वर्तमान समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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