विश्व रेडियो दिवस प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है, जो वर्ष 1946 में संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना की गौरवशाली स्मृति को समर्पित है। यूनेस्को द्वारा 2011 में घोषित और 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाए गए इस दिवस का उद्देश्य संचार के इस सशक्त माध्यम की महत्ता को रेखांकित करना है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस का मुख्य विषय (थीम) “रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक उपकरण है, आवाज नहीं” रखा गया है, जो आधुनिक तकनीक के दौर में भी रेडियो की मानवीय संवेदना और विश्वसनीयता को सर्वोपरि मानता है।
भारत में रेडियो का सफर अत्यंत ऐतिहासिक रहा है, जहाँ 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को स्वतंत्रता की घोषणा इसी के माध्यम से जन-जन तक पहुँची थी। सार्वजनिक सेवा प्रसारक के रूप में आकाशवाणी (AIR) आज 591 केंद्रों के साथ देश की लगभग 99.19% जनसंख्या तक अपनी पहुँच बना चुका है। रेडियो के लोकतंत्रीकरण की दिशा में 1 फरवरी 2004 को भारत रत्न श्री लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा देश के पहले सामुदायिक रेडियो स्टेशन का उद्घाटन एक मील का पत्थर साबित हुआ, और आज भारत में 528 सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थानीय आवाजों को सशक्त बना रहे हैं।
रेडियो की इस विरासत को सहेजने में व्यक्तिगत प्रयासों का भी बड़ा योगदान है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा निवासी राम सिंह बौद्ध, जिन्हें “भारत का रेडियो मैन” कहा जाता है, ने 1,257 रेडियो सेटों के अद्भुत संग्रह के लिए वर्ष 2025 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। वहीं, सामरिक दृष्टि से भारतीय सेना ने भी उत्तराखंड में ‘इबेक्स ताराना’ और राजौरी में ‘रेडियो संगम’ जैसे स्टेशनों के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में सूचना तंत्र को मजबूत किया है।
आज के डिजिटल युग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम ‘मन की बात’ रेडियो की स्थायी शक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है, जिसने 130 कड़ियों के माध्यम से रेडियो को पुनः राष्ट्रीय संवाद के केंद्र में ला खड़ा किया है। चाहे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जीवन रक्षक सूचनाएं देना हो या सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा पहुँचाना, रेडियो अपनी सरलता और पहुँच के कारण आज भी समाज का सबसे भरोसेमंद साथी बना हुआ है। इसी उपलक्ष्य में, वर्ष 2026 का मुख्य सम्मेलन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित किया जा रहा है, जहाँ भविष्य के रेडियो और तकनीक के समन्वय पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

