नई दिल्ली: केंद्र सरकार ग्रामीण भारत में सुशासन और पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए एक अनूठी पहल पर काम कर रही है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ‘संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान’ (RGSA) के तहत देश भर में 1,152 ग्राम पंचायतों को ‘पंचायत शिक्षण केंद्रों’ (PLC) के रूप में विकसित किया गया है। लोकसभा में एक लिखित उत्तर देते हुए केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बताया कि इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों की नेतृत्व क्षमता को निखारना और उन्हें सुशासन की दिशा में दक्ष बनाना है।
पंचायत शिक्षण केंद्रों (PLC) का मुख्य विचार उन ग्राम पंचायतों को प्रशिक्षण हब के रूप में बदलना है, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है या सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में सफलता पाई है। ये केंद्र अब ज्ञान साझा करने और व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए एक प्रभावी मंच का कार्य कर रहे हैं। यहां निर्वाचित प्रतिनिधि न केवल सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त करते हैं, बल्कि वे उन आदर्श पंचायतों के कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर बदलाव लाकर ‘बीकन’ (Beacon) पंचायतों के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
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इन केंद्रों में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल लाइब्रेरी, कंप्यूटर जैसी सूचना-प्रौद्योगिकी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। यहाँ प्रशिक्षण के लिए विशेष मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, जिनमें पंचायत शासन की प्रक्रियाएं, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की तैयारी, वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता, सार्वजनिक सेवा वितरण और नेतृत्व विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इन केंद्रों की मदद से प्रतिनिधियों को सुशासन की अच्छी प्रथाओं (Best Practices) को समझने और अपने क्षेत्रों में लागू करने में मदद मिलती है।
आंकड़ों पर गौर करें तो देश भर में अब तक 1,152 पंचायत शिक्षण केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें कर्नाटक 234 केंद्रों के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (156) और ओडिशा (160) जैसे राज्यों का स्थान है। मध्य प्रदेश में 121 और उत्तराखंड में 81 केंद्र विकसित किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, तेलंगाना और कुछ अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अभी इन केंद्रों के विकास का कार्य शून्य या शुरुआती चरण में है।
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सरकार की योजना राज्यों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर इन केंद्रों का और अधिक विस्तार करने की है। इन केंद्रों के माध्यम से सरकार का जोर इस बात पर है कि स्थानीय स्तर पर ही ऐसे ‘संसाधन केंद्र’ विकसित हों, जहाँ से सीखकर प्रतिनिधि अपने गांव को आत्मनिर्भर और विकसित बना सकें। केंद्रीय सशक्त समिति द्वारा इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद राज्यों को इनके विकास के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

