रायपुर।
छत्तीसगढ़ के राशन दुकान संचालकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर संचालकों ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए आगामी 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। राशन दुकान संचालक संघ का साफ कहना है कि यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदेश की करीब 13 हजार राशन दुकानों के शटर पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इस देशव्यापी और प्रांतीय आह्वान का सीधा असर राज्य के करीब 70 लाख राशन कार्डधारियों पर पड़ेगा, जिन्हें हर महीने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अनाज मिलता है। दुकानों के बंद होने से गरीबों के निवाले पर संकट आ सकता है।
बेहद कम मार्जिन मनी और 7 महीने से लंबित भुगतान पर नाराजगी
राशन दुकान संचालकों का कहना है कि वे वर्षों से बेहद कम मार्जिन मनी (कमीशन) पर दुकानों का संचालन कर रहे हैं, जबकि इस दौरान महंगाई, दुकान का किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों का वेतन लगातार बढ़ा है। वर्तमान में सीजीएफएस (CGFS) के तहत मात्र 30 रुपये और एनएफएसए (NFSA) के तहत 90 रुपये प्रति क्विंटल मार्जिन दिया जा रहा है। संचालकों का तर्क है कि दोनों योजनाओं में काम और जिम्मेदारी एक समान है, इसलिए इस आर्थिक संकट को दूर करने के लिए न्यूनतम 150 रुपये प्रति क्विंटल मार्जिन मनी तय की जाए। इसके साथ ही संचालकों ने आरोप लगाया कि नवंबर 2025 से लेकर अब तक (पिछले सात महीनों से) एमएफएसए की मार्जिन मनी का भुगतान लंबित है। यही नहीं, बारदाना राशि और उंगली के निशान/बायोमेट्रिक आधारित वितरण के पैसों का भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा है, जिससे कई दुकानदार कर्ज लेकर व्यवस्था चलाने को मजबूर हैं।
नई वितरण व्यवस्था और तकनीकी खामियों से बढ़ी परेशानी
संचालकों ने राशन आवंटन के नए एम-टू (M-Two) सिस्टम और तीन महीने का राशन एक साथ बांटने की सरकारी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से दुकानों में अचानक भारी भीड़ बढ़ रही है और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों के कच्चे घरों में तीन महीने का अनाज एक साथ सुरक्षित रखना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। इसके साथ ही धर्मकांटा से तौलकर आने वाले अनाज को जब दुकानों में अलग-अलग तौलकर बांटा जाता है, तो स्टॉक में कमी (शॉर्टेज) आ जाती है। इस नुकसान की भरपाई के लिए संचालकों ने सरकार से 1 प्रतिशत क्षतिपूर्ति (Wastage Allowance) देने की मांग की है।
शक्कर कमीशन और कथित झूठी एफआईआर पर तीखा विरोध
राशन दुकान संचालक संघ के अध्यक्ष नरेश बाफना ने बताया कि शक्कर वितरण पर मिलने वाला 4 पैसे प्रति किलो का कमीशन ऊँट के मुँह में जीरा के समान है, इसे बढ़ाकर 100 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए। साथ ही, उपभोक्ताओं से खुले पैसों के विवाद को खत्म करने के लिए शक्कर का बिक्री मूल्य 17 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये निर्धारित किया जाए। इसके अलावा, संघ ने पीओएस (POS) मशीनों में आने वाली तकनीकी खराबियों की जांच कराने, स्टॉक गणना की व्यवस्था को सरल बनाने और राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में दुकानदारों पर दर्ज होने वाली कथित झूठी एफआईआर (FIR) पर तुरंत रोक लगाने की मांग रखी है। जोखिम भरे काम को देखते हुए संचालकों और विक्रेताओं के लिए एक अनिवार्य बीमा योजना लागू करने की भी मांग की गई है ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में परिवारों को सुरक्षा मिल सके। अब इस महा-हड़ताल की चेतावनी के बाद जनता और प्रशासन दोनों की नजरें सरकार और संघ के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिक गई हैं।

