रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्त्रीरोग विशेषज्ञों (Gynecologists) के कुल 214 पद रिक्त पड़े हैं। यह स्थिति राज्य में सुरक्षित मातृत्व और महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े करती है।
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बेमेतरा, बीजापुर और जशपुर जैसे जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहाँ प्रत्येक जिले में 11-11 विशेषज्ञों की कमी है। इसी तरह जगदलपुर और कांकेर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी 10-10 पद खाली हैं। राज्य की राजधानी रायपुर में 3 पद रिक्त हैं, जबकि दुर्ग और राजनांदगांव जैसे बड़े शहरों में भी 8-8 विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। पूरी सूची में बिलासपुर ही एकमात्र ऐसा जिला है जहाँ रिक्त पदों की संख्या शून्य दर्शाई गई है।
विशेषज्ञों की इतनी भारी कमी का सीधा असर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति या जटिल प्रसव के दौरान स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों को लंबी दूरी तय कर बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इससे न केवल गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि समय पर इलाज न मिलने से मातृ मृत्यु दर (MMR) कम करने के सरकारी प्रयासों को भी झटका लग रहा है। सरकार को इन खाली पड़े 214 पदों पर तत्काल नियुक्ति की आवश्यकता है ताकि प्रदेश की महिलाओं को उनके अपने ही जिले में उचित स्वास्थ्य लाभ मिल सके।

