रायपुर। छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गृह विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने प्रदेश में नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा में प्रस्तुत आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से 16 फरवरी 2026 के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में अपहरण के कुल 30 गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय हैं गिरोह?
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अपहरण की ये घटनाएं केवल चुनिंदा जिलों तक सीमित नहीं हैं। विशेष रूप से रायपुर, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जैसे बड़े जिलों में इन वारदातों की आवृत्ति अधिक रही है। अपहरण के इन 30 मामलों ने पुलिस के खुफिया तंत्र और गश्त व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने इन मामलों को गंभीरता से लिया है। दर्ज हुए 30 मामलों में से अधिकांश में आरोपियों की धरपकड़ कर न्यायालय में चालान पेश किया जा चुका है। हालांकि, कुछ संवेदनशील मामलों में अभी भी विवेचना (Investigation) जारी है, जिससे पीड़ितों के परिजनों में न्याय मिलने को लेकर चिंता बनी हुई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
राज्य में अपहरण जैसे जघन्य अपराधों का ग्राफ सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और विपक्ष ने सरकार को घेरा है। जानकारों का कहना है कि प्रदेश में बढ़ते शहरीकरण और तकनीकी युग में अपहरणकर्ताओं के नए तरीके पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। प्रशासन के लिए अब यह अनिवार्य हो गया है कि वह ‘सेफ सिटी’ प्रोजेक्ट और ग्रामीण सुरक्षा समितियों को और अधिक सक्रिय करे।

