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रायपुर | 12 फरवरी 2026
छत्तीसगढ़ की जेल व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही के एक नए युग की शुरुआत हुई है। राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों के चलते प्रदेश की चार प्रमुख सेंट्रल जेलों—रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अम्बिकापुर—को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक ISO 9001:2015 का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि राज्य की सुधारात्मक न्याय प्रणाली को वैश्विक मानकों के समकक्ष खड़ा करती है।

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जेल विभाग के प्रभारी मंत्री और उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देशन में जेलों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। उपमुख्यमंत्री ने जेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से ISO सर्टिफिकेशन कराने की विशेष पहल की थी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अब प्रदेश की चार बड़ी जेलों को यह प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र मिल गया है।
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जेल अब केवल ‘बंदी गृह’ नहीं, बल्कि ‘पुनर्वास केंद्र’
राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य जेलों को केवल सजा काटने के स्थान के रूप में नहीं, बल्कि सुधार एवं पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन से जेल प्रशासन में कई महत्वपूर्ण सुधार होंगे -कार्य प्रक्रियाओं में एकरूपता आएगी, जिससे जोखिम प्रबंधन और जवाबदेही तय करना आसान होगा। कैदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण और उनके कल्याणकारी कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा। अंतरराष्ट्रीय मानक मिलने से जनविश्वास और संस्थागत साख में वृद्धि होगी। यह कदम बंदियों के मानसिक और सामाजिक सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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छत्तीसगढ़ की जेलों का यह सर्टिफिकेशन राज्य की सुधारात्मक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे जेलों के भीतर अनुशासन, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक प्रबंधन में वैश्विक स्तर की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।
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