पद्म से परम विशिष्ट सेवा तक: गणतंत्र दिवस 2026 पर देश के शूरवीरों और विभूतियों को सम्मान
भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस एक अभूतपूर्व उत्साह के साथ मना रहा है। यह दिवस केवल हमारे संविधान के लागू होने की वर्षगाँठ नहीं है, बल्कि यह सवा सौ करोड़ भारतीयों के संकल्प, गौरव और अटूट एकता का प्रतीक बन गया है। आज सुबह की पहली किरण के साथ ही समूचा देश ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से गुंजायमान हो उठा।
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सत्ता की शक्ति और जनता की भागीदारी
गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर सत्ता के शीर्ष से लेकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक, हर कोई तिरंगे की आन-बान और शान में नतमस्तक दिखेगा
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दिल्ली में राष्ट्रपति द्वारा कर्तव्य पथ पर ध्वजारोहण के साथ ही भव्य परेड के जरिए भारत की सामरिक शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री सहित देश-विदेश के दिग्गज शामिल होंगे।
राज्यों की राजधानियों में राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों ने तिरंगा फहराएंगे और प्रदेश की जनता को विकास और सुशासन का संदेश दिया।
केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विधायकों सरकारी मंचों पर, बल्कि अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जनता के बीच जाकर ध्वजारोहण करेंगे। स्थानीय निकायों के पार्षदों और पंचायत स्तर पर सरपंचों व अन्य जनप्रतिनिधियों ने गाँव की चौपालों पर तिरंगा फहराकर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करेंगे।
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शासकीय और अशासकीय संस्थानों में उत्सव
आज नियम और कायदे से ऊपर उठकर राष्ट्रभक्ति का भाव सर्वोपरि रहेगा सरकारी संस्थान कलेक्ट्रेट, थानों, अदालतों और सभी शासकीय कार्यालयों में औपचारिक गौरव के साथ ध्वजारोहण संपन्न होगा।
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सभी अशासकीय (प्राइवेट) संस्थाओं, कॉर्पोरेट ऑफिसों, सोसायटियों और छोटे-बड़े कारखानों में भी कर्मचारियों ने एकजुट होकर राष्ट्रध्वज को सलामी दी जाएगी
स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों के रंगारंग कार्यक्रमों ने ‘नए भारत’ की ऊर्जा को प्रदर्शित किया। छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में लहराते कागज के तिरंगों ने माहौल को भावुक और गरिमामय बना दिया।
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गाँव-गाँव पहुँची गणतंत्र की गूँज
इस साल के उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘केंद्रीकरण से विकेंद्रीकरण’ की ओर बढ़ना है। अब गणतंत्र का उत्सव केवल बड़े शहरों के स्टेडियमों तक सीमित नहीं है। देश के सुदूर गांवों, पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती बस्तियों में भी तिरंगा फहराया गया। हर गाँव की पंचायत में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि भारत का लोकतंत्र अब और भी परिपक्व और समावेशी हो गया है।
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“77वां साल हमें यह याद दिलाता है कि हमारा लोकतंत्र न केवल दुनिया का सबसे बड़ा है, बल्कि सबसे जीवंत भी है। गाँव की पगडंडियों से लेकर शहरों के फ्लाईओवरों तक, आज हर भारतीय के दिल में सिर्फ एक ही रंग है—तिरंगा।”

