Used Car Buying Tips: आजकल कार कंपनियां नई-नई गाड़ियां लॉन्च कर रही हैं, लेकिन लोगों का झुकाव सेकेंड हैंड (यूज्ड) कारों की तरफ भी लगातार बढ़ रहा है। कोरोना महामारी के बाद से लोगों की सोच बदली है और बहुत से लोग अब प्री-ओन्ड कारों को बेहतर विकल्प मानते हैं। वजह साफ है- कम दाम में अच्छी कार, ज्यादा वैरायटी और जेब पर हल्का बोझ। यही कारण है कि भारत में यूज्ड कार मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। और आने वाले वर्षों में यह और भी बड़ा हो जाएगा।
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हालांकि, सेकेंड हैंड कार खरीदते समय कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी। अगर सही तरीके से ध्यान दिया जाए तो यह एक शानदार डील साबित हो सकती है। लेकिन अगर गलती हो गई तो सिरदर्द भी बन सकती है। यहां हम आपको बता रहे हैं सेकेंड हैंड कार खरीदते वक्त किन 6 बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
कीमत है सबसे बड़ा फायदा
नई कार शोरूम से बाहर निकलते ही अपनी वैल्यू खोने लगती है। पहले ही साल में उसकी कीमत करीब 20 प्रतिशत तक गिर जाती है। ऐसे में अगर आप एक साल पुरानी कार खरीदते हैं तो सीधे-सीधे 20 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है। ज्यादातर लोग नई कार पहले साल बहुत कम चलाते हैं, तो अगर वे बेच दें तो आपको बढ़िया डील मिल सकती है। लेकिन, सिर्फ दाम देखकर फैसला ना करें। कार की अच्छे से जांच जरूर करें।
मनचाहा वेरिएंट सस्ते में
अक्सर नई कार का टॉप मॉडल लेना महंगा पड़ता है। लेकिन सेकेंड हैंड मार्केट में यही टॉप वेरिएंट आपको काफी कम दाम पर मिल सकता है। अगर ढूंढने की मेहनत करें तो कभी-कभी ऐसी कार भी मिल जाती है जो कम चली हो और टॉप स्पेक वेरिएंट हो। और वो भी उस दाम में जिसमें नई कार का बेस मॉडल आता है।
कम लोन और कम इंश्योरेंस प्रीमियम
पुरानी कार सस्ती होने की वजह से आपको ज्यादा लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ती। इसका मतलब है कम ईएमआई और कम ब्याज। ध्यान रहे कि पुरानी कार पर लोन की ब्याज दर आमतौर पर थोड़ी ज्यादा होती है। लेकिन दूसरी तरफ, पुरानी कार का इंश्योरेंस प्रीमियम नई कार की तुलना में काफी कम होता है। क्योंकि उसकी वैल्यू (IDV) घट चुकी होती है।
पेपरवर्क की झंझट नहीं
अगर आप किसी डीलरशिप से कार खरीद रहे हैं तो गाड़ी की पूरी जांच-पड़ताल और पेपरवर्क डीलर ही कर देता है। इससे आपका सिरदर्द कम हो जाता है। लेकिन, अगर आप किसी व्यक्ति से सीधे कार खरीद रहे हैं तो कागजी कार्रवाई खुद ही करनी होगी।
हर जगह वारंटी नहीं मिलती
अगर आप कार किसी कंपनी की आधिकारिक डीलरशिप से खरीदते हैं और गाड़ी अभी वारंटी पीरियड में है, तो आपको डबल फायदा मिल सकता है। कंपनी की ओरिजिनल वारंटी और डीलर की दी हुई वारंटी। लेकिन, अगर आप कार किसी निजी व्यक्ति से खरीद रहे हैं तो वारंटी ट्रांसफर नहीं होती।