डिजिटल सुरक्षा : 28 लाख चोरी के फोन ट्रेस, 2.24 करोड़ फर्जी सिम बंद और सुरक्षित हुए नागरिकों के ₹1000 करोड़
नई दिल्ली: भारतीय रेल लंबी दूरी के सफर को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाने जा रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार ने कुल 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इन ट्रेनों का निर्माण बीईएमएल और चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा तकनीकी साझेदारों के साथ मिलकर किया जा रहा है, जिसमें प्रोटोटाइप विकास से लेकर व्यापक परीक्षण तक की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
यह नई पीढ़ी की स्लीपर ट्रेनें न केवल अपनी 180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति के लिए जानी जाएंगी, बल्कि सुरक्षा के मामले में भी ये बेजोड़ होंगी। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन्हें स्वदेशी ‘कवच’ प्रणाली से लैस किया गया है और इनके कोच को ‘क्रैश-योग्य’ डिजाइन के आधार पर बनाया गया है, जो आपात स्थिति में झटकों को सहने और दुर्घटना के प्रभाव को कम करने में सक्षम है। ट्रेन के भीतर सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए प्रत्येक कोच में सीसीटीवी कैमरे और यात्रियों व लोको पायलट के बीच तत्काल संचार के लिए ‘इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट’ लगाई गई है।
सफर के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इन ट्रेनों की एयर कंडीशनिंग यूनिट में UV-C लैम्प आधारित कीटाणुशोधन प्रणाली दी गई है, जो हवा से 99% हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर देती है। साथ ही, आधुनिक सुख-सुविधाओं के तौर पर इनमें केंद्रीय नियंत्रित स्वचालित प्लग डोर, पूरी तरह से सील किए गए चौड़े गलियारे और ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई आरामदायक सीढ़ियां शामिल की गई हैं।
दिव्यांग यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष शौचालयों और अग्नि सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक एरोसोल आधारित तकनीक से लैस ये ट्रेनें भारतीय रेलवे की तस्वीर बदलने के लिए तैयार हैं। इन ट्रेनसेटों को मांग और परिचालन संबंधी तैयारियों के आधार पर धीरे-धीरे यात्री सेवाओं में शामिल किया जाएगा, जिससे लंबी दूरी का सफर हवाई यात्रा जैसा सुगम और सुरक्षित बन सकेगा।

