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नई दिल्ली | 26 मार्च 2026
भारतीय रेलवे अब अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़ते हुए सुरक्षा, तकनीक और यात्री सुविधाओं के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि रेलवे ने संचार व्यवस्था को आधुनिक बनाने और ‘कवच’ स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के विस्तार के लिए 1,236 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस बड़ी योजना के तहत दक्षिण रेलवे के उच्च-यातायात वाले 548 किलोमीटर के मार्गों पर ‘कवच 4.0’ टक्कर-रोधी तकनीक लगाई जाएगी, जो दो ट्रेनों के आमने-सामने आने पर स्वतः ब्रेक लगाकर हादसों को रोकेगी। इसके साथ ही, मध्य और पश्चिम रेलवे के पूरे नेटवर्क में हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर बिछाया जा रहा है, जिससे न केवल ट्रेनों का संचालन सुरक्षित होगा, बल्कि रेलवे को अतिरिक्त डार्क फाइबर लीज पर देकर राजस्व भी प्राप्त होगा।
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यात्रियों के सफर को यादगार बनाने के लिए रेलवे ने अब खान-पान के मेनू में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। रेल मंत्रालय ने आईआरसीटीसी (IRCTC) को अनुमति दी है कि वह ट्रेनों में यात्रियों को उनकी पसंद के अनुसार क्षेत्रीय और स्थानीय व्यंजन परोसे। अब यात्री अपनी यात्रा के दौरान गुजरात के प्रसिद्ध थेपला, पश्चिम बंगाल के माछेर झोल, राजस्थान की प्याज कचौरी, मध्य प्रदेश के इंदौरी पोहा और कर्नाटक के मेदु वड़ा जैसे प्रामाणिक स्वादों का आनंद ले सकेंगे। रेलवे हर साल लगभग 58 करोड़ भोजन परोसता है और अब ओवरचार्जिंग रोकने के लिए पीओएस मशीनों, क्यूआर कोड आधारित बिलिंग और एसएमएस के जरिए रेट लिस्ट भेजने जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य कर दी गई हैं, ताकि यात्रियों से अधिक पैसा न वसूला जा सके।
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टिकट बुकिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और दलालों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आईआरसीटीसी ने ‘आधार प्रमाणीकरण’ को अनिवार्य कर दिया है। 1 जुलाई 2025 से ‘तत्काल’ और एडवांस बुकिंग के पहले दिन टिकट बुक करने के लिए आधार वेरिफिकेशन जरूरी है। इस सख्त कदम का असर यह हुआ है कि पिछले एक साल में करीब 3.04 करोड़ फर्जी यूजर अकाउंट बंद किए जा चुके हैं। साथ ही, एंटी-बॉट तकनीक के जरिए 64% दुर्भावनापूर्ण ट्रैफिक को रोका गया है, जिससे अब वास्तविक यात्रियों को टिकट मिलना पहले से काफी आसान हो गया है। वर्तमान में देश के 88% आरक्षित टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं, जिससे न केवल समय की बचत हो रही है बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ी है।
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आम नागरिकों और मध्यम आय वर्ग के परिवारों की जरूरतों का ख्याल रखते हुए रेलवे अब 17,000 नए गैर-एसी (सामान्य और स्लीपर) कोच का निर्माण कर रहा है। पिछले पांच वर्षों में यात्री मांग को पूरा करने के लिए 1,024 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं और 4,651 अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं। रेलवे में अभी भी 70% कोच नॉन-एसी हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि कम आय वाले परिवारों को यात्रा में कोई असुविधा न हो। त्योहारों और छुट्टियों की भीड़ को देखते हुए केवल पिछले एक साल में 74,800 विशेष ट्रेनें चलाई गई हैं। रेलवे ने ‘रेल मदद’ (139 हेल्पलाइन) को भी और सुदृढ़ किया है, जहाँ यात्री शिकायत के साथ-साथ त्वरित सहायता और फीडबैक की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
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