अगर आप iPhone या Android यूजर हैं, तो बीते हफ्ते की वो खबर आपको याद होगी जिसने सबको चौंका दिया था। Google और Apple ने अपने कई भारतीय यूजर्स को Spyware Alert भेजा था, जिसमें हैकिंग की आशंका जताई गई थी। अब इस मामले में केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सरकार ने Apple को नोटिस भेजकर पूछा है कि आखिर ये खतरे किस तरह के हैं और इनका पता कैसे चला? साथ ही, सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने आम जनता के लिए एक जरूरी सलाह (Advisory) जारी की है।
सरकार का Apple से सीधा सवाल: क्या है खतरे की सच्चाई?
बीते 2-3 दिसंबर को जब Apple और Google ने यूजर्स को अलर्ट भेजा, तो हड़कंप मच गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Apple को नोटिस थमा दिया है। सरकार जानना चाहती है कि कंपनी ने इन ‘थ्रेट्स’ (Threats) को कैसे डिटेक्ट किया?
सरकार ने कंपनी से पूछा है कि यह स्पाईवेयर किस तकनीक पर आधारित है और इससे भारत में कितने यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं? साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के Apple Spyware Alert चिंता का विषय हैं क्योंकि डिजिटल दुनिया में सेंधमारी के तरीके लगातार खतरनाक होते जा रहे हैं।
CERT-In की एडवाइजरी: यूजर्स तुरंत करें ये काम
सरकार सिर्फ नोटिस भेजने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसने यूजर्स की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाए हैं। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने एक पब्लिक एडवाइजरी जारी की है। एजेंसी ने कहा है कि Apple ने कुछ आईडी को रिमोटली (दूर से) हैक करने की कोशिशों को पकड़ा है।
बचाव के लिए क्या करें?
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अपडेट करें: सभी iPhone यूजर्स अपने डिवाइस को तुरंत लेटेस्ट iOS वर्जन पर अपडेट करें।
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लॉकडाउन मोड: अगर आपको लगता है कि आप निशाने पर हैं, तो फोन में ‘Lockdown Mode’ इनेबल कर लें।
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सतर्क रहें: स्क्रीन पर आने वाले किसी भी अनजान प्रॉम्प्ट या लिंक पर क्लिक न करें।
CERT-In ने यह भी कहा है कि जिन यूजर्स को कंपनी की तरफ से चेतावनी वाला मैसेज मिला है, वे सीधे एजेंसी से संपर्क कर तकनीकी मदद ले सकते हैं और अपने डिवाइस की जांच करवा सकते हैं।
Apple की सफाई: ‘यह इंटरनल सिग्नल थे’
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, नोटिस मिलने के बाद Apple के अधिकारियों ने केंद्र सरकार और CERT-In के साथ बैठक की है। अपनी सफाई में कंपनी ने कहा है कि यूजर्स को भेजे गए नोटिफिकेशन उनके ‘इंटरनल थ्रेट सिग्नल्स’ (Internal Threat Signals) पर आधारित थे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इन अलर्ट्स के पीछे उन्होंने किसी विशिष्ट सरकार या एजेंसी का हाथ होने की बात नहीं कही है। यह केवल सिस्टम द्वारा पकड़ी गई संदिग्ध गतिविधियों का परिणाम था।
निष्कर्ष: डिजिटल सुरक्षा है सबसे जरूरी
यह घटना बताती है कि चाहे आप कितने भी सुरक्षित डिवाइस का इस्तेमाल क्यों न करें, हैकर्स नए रास्ते खोज ही लेते हैं। सरकार द्वारा Apple से जवाब मांगना एक सकारात्मक कदम है, जिससे टेक कंपनियों की जवाबदेही तय होगी। फिलहाल, गेंद Apple के पाले में है कि वह सरकार को क्या तकनीकी जानकारी सौंपती है। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।

