नई दिल्ली: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी अगस्त माह के मासिक ड्रग अलर्ट में देश की दवा गुणवत्ता को लेकर गंभीर खुलासा हुआ है। देशभर में निर्मित 220 दवाओं के नमूने गुणवत्ता मानकों (Not of Standard Quality – NSQ) पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें अकेले देश के सबसे बड़े फार्मा हब हिमाचल प्रदेश में बनी 64 दवाएं शामिल हैं। फेल हुए नमूनों में बच्चों के बुखार और खांसी के सिरप, एंटीबायोटिक, पेनकिलर, गैस्ट्रिक इंजेक्शन, विटामिन और एंटी-डायबिटिक दवाएं शामिल हैं। एक नमूना जांच में नकली (Spurious) भी पाया गया है।
हिमाचल के सोलन और सिरमौर जिले में सबसे ज्यादा नमूने फेल सीडीएससीओ की रिपोर्ट के अनुसार, गुणवत्ता जांच में फेल 220 नमूनों में से 191 राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं और 29 केंद्रीय प्रयोगशालाओं की जांच में मानकों पर असफल रहे हैं। हिमाचल में प्रभावित दवा इकाइयों का विवरण इस प्रकार है:
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सोलन जिला (33 दवाएं): सबसे अधिक नमूने बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ (BBN), झाड़माजरी, भुड्ड और कुमारहट्टी की निर्माण इकाइयों से फेल हुए।
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सिरमौर जिला (24 दवाएं): पांवटा साहिब और कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र की दवा फैक्ट्रियों के 24 नमूने फेल रहे।
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अन्य जिले: ऊना से 4, कांगड़ा से 2 और बिलासपुर से 1 दवा का नमूना गुणवत्ता जांच में पास नहीं हो सका।
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कई दवा कंपनियों के दो से अधिक उत्पादों के नमूने फेल हुए हैं, वहीं कुछ ऐसी इकाइयां भी हैं जिनके सैंपल बार-बार फेल हो रहे हैं।
घुलनशीलता, सक्रिय तत्व और pH स्तर में मिली खामियां लैब परीक्षण के दौरान दवा नमूनों में घुलने की निर्धारित क्षमता (Dissolution), एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट (API की वास्तविक मात्रा), निष्क्रमण (Sterility), अम्लीयता/क्षारीयता (pH मान) और कणों की निर्धारित सीमा जैसे अहम पैरामीटर्स में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।
ये प्रमुख जीवनरक्षक और दैनिक उपयोग की दवाएं हुईं फेल
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एंटीबायोटिक्स व एंटी-इन्फेक्शन्स: लाइनजोलिड, सिफ्योरोक्सिम एक्सेल, एजिथ्रोमाइसीन विद लैक्टिक एसिड बेसिलस, एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन और इट्राकोनाजोल कैप्सूल।
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शिशु व बाल रोग: बच्चों का पेरासिटामोल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन, मोंटेलुकास्ट और लेवोसेटिरिजिन एंटी-एलर्जी सिरप, सैफोडॉक्सिम ओरल सस्पेंशन।
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दर्द निवारक व आर्थराइटिस: एसिक्लोफेनाक-पेरासिटामोल और सेराटियोपेप्टिडेस टैबलेट्स।
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डायबिटीज व एसिडिटी: सिटाग्लिप्टिन फॉस्फेट एंड मेटफॉर्मिन, विल्डाग्लिप्टिन, राबेप्राजोल सोडियम इंजेक्शन और एसोमेप्राजोल मैग्नीशियम।
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विटामिन व सप्लीमेंट्स: कैल्शियम कार्बोनेट विद विटामिन D3, जिंक-मैग्नीशियम-विटामिन K2 और मीकोबालामिन विद अल्फा लिपोइक एसिड कैप्सूल।
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न्यूरो: प्रेगाबेलिन सस्टेंड रिलीज टैबलेट।
हिमाचल में 2026 में अब तक फेल हुए नमूनों का आंकड़ा
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जनवरी: 71 दवाएं
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फरवरी: 73 दवाएं
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मार्च: 76 दवाएं
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अप्रैल: 31 दवाएं
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मई: 43 दवाएं
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जून: 46 दवाएं
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जुलाई: 83 दवाएं
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अगस्त: 64 दवाएं
“गुणवत्ता जांच में फेल नमूनों से संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। नियमों के तहत संबंधित बैच के पूरे स्टॉक की बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”
— डॉ. मनीष कपूर, राज्य औषधि नियंत्रक (हिमाचल प्रदेश)


