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आधुनिकता की चकाचौंध और विदेशी फलों की होड़ में हम अपनी मिट्टी के उन रत्नों को भूलते जा रहे हैं जो कभी हमारी सेहत और संस्कृति का आधार थे। इन्हीं में से एक दुर्लभ फल है बड़हर। कटहल की प्रजाति से ताल्लुक रखने वाला यह फल आज भले ही हमारी थालियों से गायब हो रहा हो, लेकिन इसके औषधीय लाभ आज भी विज्ञान और आयुर्वेद दोनों के लिए कौतूहल का विषय हैं। आम के सीजन के ठीक बाद जब फलों का अकाल सा पड़ता है, तब बड़हर अपनी खट्टी-मीठी खुशबू के साथ दस्तक देता है।
बड़हर की सबसे बड़ी खूबी इसकी बहुमुखी उपयोगिता है। इसके फूलों की महक रसोई में सब्जी के रूप में सजती है, तो कच्चे फलों का तीखा अचार साल भर के लिए स्वाद का साथी बन जाता है। पुराने समय में इसे पकाने की तकनीक भी पूरी तरह प्राकृतिक थी; कच्चे फलों को जूट की बोरियों या भूसे के ढेर में छिपाकर रखा जाता था। इस पारंपरिक पद्धति से पकने वाला फल न केवल मिठास में बेमिसाल होता था, बल्कि अपनी पौष्टिकता भी बरकरार रखता था।
सेहत के नजरिए से देखें तो बड़हर किसी चमत्कार से कम नहीं है। आयरन का प्रचुर भंडार होने के कारण यह शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को तेजी से पूरा करता है और एनीमिया जैसी बीमारियों के लिए रामबाण है। यह शरीर के भीतर जमी गंदगी को बाहर निकालकर रक्त को शुद्ध करने वाले एक प्राकृतिक डिटॉक्स की तरह काम करता है। इसमें मौजूद विटामिन ए और सी न सिर्फ आंखों की रोशनी तेज करते हैं और बालों को जड़ों से मजबूती देते हैं, बल्कि त्वचा की झुर्रियों को मिटाकर बढ़ती उम्र के असर को भी थाम लेते हैं। यही कारण है कि प्राचीन काल में राजा-महाराजा अपनी लंबी आयु और ओज के लिए इसका नियमित सेवन किया करते थे।
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मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बड़हर एक वरदान है। यह तनाव और चिंता के स्तर को कम कर मस्तिष्क को सतर्क रखता है और चिड़चिड़ेपन से राहत दिलाता है। इतना ही नहीं, बड़हर के पत्तों का अर्क या क्वाथ शुगर की समस्या में भी विशेष लाभकारी माना गया है।
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दुर्भाग्यवश, आज इस पौधे को लगाने के प्रति उत्साह कम हो गया है। हालांकि, इसे उगाना बहुत सरल है। बीज से अंकुरण तैयार कर या नर्सरी से कलमी पौधा लाकर हम इसे पुनर्जीवित कर सकते हैं। कलमी पौधों की विशेषता यह है कि इनमें फल जल्दी आते हैं, बस जरूरत इस बात की है कि शुरुआती एक-दो साल पौधे को मजबूती से विकसित होने दिया जाए।
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आज समय की मांग है कि हम ‘गुणों की इस खान’ को पहचानें। बड़हर का एक पौधा न केवल पर्यावरण को समृद्ध करेगा, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को तनावमुक्त और रोगमुक्त जीवन की सौगात भी देगा। अपने आसपास इस विलुप्त होते वृक्ष को स्थान दें और प्रकृति के इस अनमोल उपहार को फिर से सहेजें।
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