हिंदू पंचांग के अंतिम और सबसे आनंदमयी महीने ‘फाल्गुन’ की शुरुआत सोमवार, 2 फरवरी 2026 से हो चुकी है। शीत ऋतु की विदाई और वसंत के आगमन का यह संधिकाल प्रकृति के साथ-साथ मानवीय मन में भी नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। विश्व प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में परंपरागत होरी-धमार गायन के साथ ब्रज में होली का उल्लास शुरू हो गया है, वहीं देशभर के शिवालयों में महाशिवरात्रि की तैयारियां तेज हो गई हैं।
शिव और कृष्ण की भक्ति का संगम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन का महीना विशेष रूप से भगवान शिव और श्रीकृष्ण को समर्पित है। जहां एक ओर 15 फरवरी को शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का पर्व महाशिवरात्रि मनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन में अबीर-गुलाल और टेसू के फूलों की वर्षा के बीच ‘फाग’ के गीत गूंजने लगे हैं।

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फरवरी 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और व्रत
इस महीने में कई बड़े धार्मिक आयोजन होने जा रहे हैं:
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13 फरवरी: विजया एकादशी
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15 फरवरी: महाशिवरात्रि (पूजा का प्रथम प्रहर शाम 6:39 बजे से शुरू)
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17 फरवरी: फाल्गुन अमावस्या (इसी दिन सूर्य ग्रहण लगेगा, हालांकि यह भारत में दृश्यमान नहीं होगा)
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24 फरवरी: होलाष्टक प्रारंभ (मांगलिक कार्यों पर रोक)
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25 फरवरी: बरसाना की विश्व प्रसिद्ध लठमार होली
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26 फरवरी: नंदगांव की लठमार होली
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3 मार्च: होलिका दहन और चंद्र ग्रहण (भारत में शाम 6:26 से 6:46 तक दिखेगा)
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4 मार्च: रंग वाली धुलेंडी (होली)
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ग्रहण का अनोखा संयोग
ज्योतिषविदों के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन मास में दो ग्रहण लग रहे हैं। 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण होगा, जबकि 3 मार्च (पूर्णिमा) को खण्डग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिसका सूतक काल सुबह 9:39 मिनट से ही प्रारंभ हो जाएगा।

फाल्गुन में क्या करें और क्या न करें?
शास्त्रों में फाल्गुन मास को आत्मशुद्धि का महीना बताया गया है:
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दान का महत्व: इस महीने शुद्ध घी, अनाज, सरसों का तेल और वस्त्रों का दान ग्रह दोषों को शांत करता है।
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साधना: चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है और श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा संतान सुख प्रदान करती है।
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सावधानी: होलाष्टक (24 फरवरी से 3 मार्च) के दौरान विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। साथ ही, तामसिक भोजन और नशीली वस्तुओं से परहेज की सलाह दी गई है।
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ब्रज में ‘होरी-धमार’ की धूम
नंदगांव के सेवायत रमेश गोस्वामी के अनुसार, वसंत पंचमी से शुरू हुआ समाज गायन अब धमारों में बदल गया है। “गौरी आयो फागुन मास” जैसे पदों पर रसिक जन झूम रहे हैं। यह महीना प्रेम, मर्यादा और उल्लास का प्रतीक है, जो जीवन में मधुरता घोलने का संदेश देता है।

