जशपुर जिले में पुलिस महकमे के भीतर अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को लेकर पुलिस कप्तान ने एक बेहद सख्त रुख अपनाया है। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह ने कर्तव्य के प्रति घोर अनुशासनहीनता, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने वाले जिले के पांच पुलिस आरक्षकों के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद, बिना सूचना के लंबे समय तक गायब रहने वाले पांच में से तीन आरक्षकों को नौकरी से बर्खास्त यानी सेवा से पृथक कर दिया गया है, जबकि दो अन्य आरक्षकों को गंभीर वित्तीय दंड दिया गया है। पुलिस कप्तान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस विभाग में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह अंतिम आदेश पुलिस रेगुलेशन के नियम 221 अ में प्रदत्त शक्तियों के तहत पारित किया गया है।
विभागीय जानकारी के अनुसार ये पांचों आरक्षक लंबे समय तक बिना किसी पूर्व सूचना या अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से नदारद रहते थे। बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद इनके आचरण में कोई सुधार नहीं हुआ। इन कर्मियों ने छत्तीसगढ़ पुलिस रेगुलेशन 64 2 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उप-नियम 1 का खुला उल्लंघन किया, जिसके बाद इनके खिलाफ विभागीय जांच संस्थित की गई थी।
कार्रवाई के विवरण के अनुसार पहले अपचारी आरक्षक क्रमांक 737 संतोष कुमार राम ने अपनी 13 वर्ष की सेवा में 33 बार अलग-अलग समय पर कुल 469 दिन गैर-हाजिर रहकर स्वेच्छाचारिता दिखाई। पूरे सेवाकाल में उन्हें सिर्फ 9 इनाम मिले जबकि 23 बार सजा मिल चुकी थी। वर्ष 2023-24 में कुल 106 दिनों तक बिना सूचना के गायब रहने पर जांच के बाद उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया है। दूसरे अपचारी आरक्षक क्रमांक 525 नेल्सन तिग्गा अपनी 17 वर्ष की सेवा में 28 बार में कुल 923 दिन ड्यूटी से गायब रहे। सेवाकाल के दौरान इन्हें 27 बार सजा दी गई थी। विभागीय जांच के दौरान बार-बार नोटिस जारी होने के बाद भी यह उपस्थित नहीं हो रहे थे, जिसके चलते इन्हें भी सेवा से पृथक कर दिया गया है। तीसरे अपचारी आरक्षक क्रमांक 394 अशोक कुमार एक्का ने अपनी 20 वर्ष की सेवा में 30 बार में कुल 1151 दिन तक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने का रिकॉर्ड बनाया। पूरे सेवाकाल में उन्हें 7 इनाम और 19 बार निंदा सहित कई बड़ी सजाएं मिल चुकी थीं, आचरण में सुधार न होने पर इन्हें भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।
बाकी बचे दो आरक्षकों को सेवा पुस्तिका के अवलोकन के बाद अलग तरह से दंडित किया गया है। चौथे अपचारी आरक्षक क्रमांक 47 इरीमियस कुजूर अपनी 17 वर्ष की सेवा में कुल 139 दिन अनाधिकृत रूप से गैर-हाजिर रहे। सेवाकाल में इन्हें 29 इनाम और 4 सजाएं मिली थीं। इन्हें एक वेतन वृद्धि के बराबर धनराशि की कमी संचयी प्रभाव से भुगतने के दंड से दंडित किया गया है। पांचवें अपचारी आरक्षक क्रमांक 144 बिंदेश्वर राम अपनी 18 वर्ष की सेवा में कुल 216 दिन गायब रहे। इन्हें 14 इनाम और 6 छोटी सजाएं मिली थीं। इन्हें आरक्षक के न्यूनतम वेतनमान में लाने का कड़ा दंड दिया गया है, जिसका सीधा असर इनकी भविष्य की वेतन वृद्धि और पेंशन पर भी पड़ेगा।
इस पूरे मामले में डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ लाल उमेद सिंह ने बताया कि पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा अनुशासनहीनता, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि ऐसे पुलिस कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

