”शिक्षण या डेटा एंट्री? VSK ऐप के मकड़जाल में फंसा शिक्षक”
रायपुर
छत्तीसगढ़ में अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सहायक शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। ‘छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन’ की हालिया ऑनलाइन बैठक में प्रदेश के शिक्षकों ने आर-पार की लड़ाई का निर्णय लेते हुए 15 जुलाई को राजधानी रायपुर में विधानसभा घेराव का ऐलान किया है, जिसे फेडरेशन द्वारा ‘महाआंदोलन’ की संज्ञा दी गई है।

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प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राठौर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से चलाने की रणनीति तय की गई है, जिसके तहत 6 जुलाई को शिक्षा सचिव से मुलाकात और रायपुर में प्रेसवार्ता का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 7 से 13 जुलाई तक राज्य के सभी सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा और अंततः 15 जुलाई को प्रदेशभर के शिक्षक एकजुट होकर विधानसभा का घेराव करेंगे।
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फेडरेशन की प्रमुख मांगों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पदोन्नति में वरिष्ठता का ध्यान रखना और पात्रता समय-सीमा को 30 अगस्त 2028 तक सुनिश्चित करना शामिल है। इसके साथ ही, सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित करने, ‘मोदी की गारंटी’ के तहत सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कर क्रमोन्नति वेतन देने और प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना करते हुए समस्त लाभ प्रदान करने की मांग की गई है।
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इसके अलावा, एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था कर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा VSK ऐप की तकनीकी समस्याओं के समाधान तक शिक्षकों का वेतन न काटने का आग्रह भी सरकार से किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राठौर ने सभी शिक्षकों और पदाधिकारियों से आह्वान किया है कि वे इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए पूरी एकजुटता के साथ मैदान में उतरें, क्योंकि यह लड़ाई सीधे तौर पर शिक्षकों के भविष्य और अधिकारों से जुड़ी है।

