रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर पूछे गए एक तीखे सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। विधायक संदीप साहू द्वारा छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) द्वारा खरीदी गई दवाओं के गुणवत्ता परीक्षण पर जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में सरकार ने स्वीकार किया है कि बीते कुछ वर्षों में खरीदी गई कई दवाइयां परीक्षण के दौरान मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर जनवरी 2026 तक खरीदी गई दवाओं के नमूने जांच के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) और अन्य मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह पुष्टि हुई है कि कुछ दवाइयां भारतीय औषधि संहिता के मानकों के अनुरूप नहीं थीं।
दोषी आपूर्तिकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई अमानक (NSQ) और नकली दवाइयों की पहचान होने के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, मानकों के अनुरूप दवाइयां नहीं पाए जाने के कारण संबंधित आपूर्तिकर्ताओं और जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है। सरकार ने इन कंपनियों के नाम, बैच संख्या और उन पर की गई ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई का पूरा विवरण सदन के पटल पर रख दिया है।
गुणवत्ता से समझौता नहीं सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में वितरण के लिए आने वाली हर दवा की गुणवत्ता जांच अनिवार्य है। जो भी कंपनियां अमानक दवाओं की आपूर्ति कर रही हैं, उन्हें न केवल भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है, बल्कि उनसे रिकवरी और अन्य विधिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अब आने वाले समय में दवाइयों की सप्लाई चेन पर निगरानी और सख्त की जा सकती है।



