नई दिल्ली।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने और पुराने व्यावसायिक वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को एक बड़ी रफ्तार मिली है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और देश के तीन और बड़े वाहन निर्माताओं (OEMs) के बीच आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस नई साझेदारी में वोल्वो आइशर कमर्शियल व्हीकल्स (VECV), फोर्स मोटर्स और पिनैकल मोबिलिटी सॉल्यूशंस भी सरकार की इस विशेष छूट योजना में शामिल हो गए हैं।
इस समझौते के तहत, ये कंपनियां दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्क्रैप (कबाड़) किए जाने वाले पुराने ट्रकों और बसों के बदले खरीदे जाने वाले नए वाहनों पर 8 प्रतिशत की बड़ी छूट (Discount) प्रदान करेंगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदता है, तो उसे उसी श्रेणी के डीजल या पेट्रोल (ICE) इंजन वाले वाहन के बराबर छूट मिलेगी, जिसका सकल वाहन भार (GVW) समान हो।
खास बात यह है कि इस योजना को बेहद आकर्षक बनाने के लिए सरकार और कंपनियां मिलकर चौतरफा रियायतें दे रही हैं:
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कंपनियों की ओर से: नए ट्रक या बस की एक्स-शोरूम कीमत पर सीधे 8% की छूट मिलेगी।
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केंद्र सरकार की ओर से: नए वाहन की खरीद पर पांच वर्षों की अवधि के लिए 5% की ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy) दी जाएगी। इसके साथ ही एक निर्धारित मासिक ईंधन वाउचर (Fuel Voucher) भी प्रदान किया जाएगा।
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राज्य सरकारों की ओर से: इस योजना में भाग लेने वाली राज्य सरकारें पात्र लाभार्थियों को 10 वर्षों की अवधि के लिए मोटर वाहन कर (रोड टैक्स) पर शत-प्रतिशत (100%) तक की छूट और पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) में पूरी माफी देंगी।
इस योजना के पहले चरण में छह अन्य दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियां—अशोक लेलैंड, स्विच मोबिलिटी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एसएमएल इसुजु और डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स (DICV)—पहले ही सरकार के साथ हाथ मिला चुकी हैं। अब इन तीन नई कंपनियों के शामिल होने के बाद, समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले कुल 9 OEMs की ट्रकों और बसों के घरेलू बाजार में 95 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी बाजार हिस्सेदारी के साथ यह योजना दिल्ली-एनसीआर में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों को आधुनिक व स्वच्छ वाहनों से बदलने में गेम-चेंजर साबित होगी।


