नई दिल्ली | 19 फरवरी, 2026
केंद्र सरकार ने केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) के दायरे में आने वाले 42 लाख से अधिक लाभार्थियों के हक में एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। सरकार के इस कदम से अब उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी जिनका इलाज का खर्च 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक आता है। नए नियमों के मुताबिक, अब इस सीमा तक के मेडिकल बिलों की फाइल बिना किसी देरी के स्वीकृत हो जाएगी क्योंकि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के विभागाध्यक्षों (HOD) को ही सीधे यह मंजूरी प्रदान करने के अधिकार दे दिए गए हैं।
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दफ्तरों के चक्कर और कागजी देरी से मिलेगी मुक्ति
अब तक की व्यवस्था में सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए इलाज की मंजूरी की सीमा 2 से 5 लाख रुपये तक निर्धारित थी, जिसे लगभग 10 साल पहले तय किया गया था। पहले जब इलाज का खर्च 5 लाख रुपये से अधिक होता था, तो विभागाध्यक्ष फाइल को सीधे मंजूरी नहीं दे सकते थे। उन्हें इस फाइल को संबंधित मंत्रालय या विभाग के आंतरिक वित्त प्रभाग (IFD) के पास भेजना पड़ता था। IFD में दस्तावेजों की बारीकी से जांच और तकनीकी खामियों को सुधारने की प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था, जिससे लाभार्थियों को भुगतान मिलने में लंबी देरी का सामना करना पड़ता था।
त्वरित भरपाई और सरल प्रक्रिया
नए बदलाव के बाद लाभार्थियों को अपनी फाइल की स्थिति जानने के लिए अलग-अलग डेस्क और दफ्तरों के चक्कर काटने से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा। हालांकि, इलाज का शुरुआती खर्च लाभार्थी को खुद ही वहन करना होगा, लेकिन बिल जमा करने के बाद विभाग द्वारा उस राशि की भरपाई अत्यंत तीव्र गति से की जाएगी। विभागाध्यक्षों को सीधे अधिकार मिलने से फाइलों को वित्त प्रभाग भेजने की अनिवार्यता खत्म हो गई है, जिससे मेडिकल बिलों के निपटारे में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
सरकार का यह निर्णय विशेष रूप से उन पेंशनभोगियों और सेवारत कर्मचारियों के लिए मददगार साबित होगा, जिन्हें गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान बड़े खर्चों की प्रतिपूर्ति के लिए मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती थी। इस ऐतिहासिक सुधार के साथ अब 10 लाख रुपये तक के क्लेम एक ही छत के नीचे कम से कम समय में स्वीकृत हो सकेंगे।

